हरिद्वार। हरिद्वार जिले में पीएम पोषण योजना के तहत संचालित मदरसों की जांच में बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है। छात्र संख्या अधिक दिखाकर काला धन कमा रहे मदरसा संचालक, पीएम पोषण योजना को चूना लगा रहे हैं।
मदरसों में 206 से अधिक बच्चों का रिकॉर्ड संदिग्ध मिला है, जबकि कई बच्चों को एक ही समय में अलग-अलग मदरसों में पढ़ता हुआ दर्शाया गया।
सबसे चौंकाने वाला मामला लक्सर क्षेत्र में सामने आया, जहां तीन मदरसों की मान्यता पर छह मदरसे संचालित किए जा रहे थे। प्रशासन ने जिले के 131 मदरसों की प्रारंभिक जांच कराई थी, जिसमें 23 मदरसे संदिग्ध पाए गए हैं। फिलहाल 11 मदरसों की पीएम पोषण योजना की धनराशि रोक दी गई है। जांच में सामने आया कि कुछ मदरसों में वास्तविक छात्र संख्या से अधिक बच्चों का रिकॉर्ड तैयार किया गया था, ताकि पीएम पोषण योजना के तहत अधिक सरकारी धनराशि प्राप्त की जा सके। विभागीय अधिकारियों के अनुसार कक्षा एक से पांच तक प्रति छात्र करीब सात रुपये और कक्षा छह से आठ तक करीब 10 रुपये प्रतिदिन भोजन मद में दिए जाते हैं।
इस योजना का लाभ लेने के लिए फर्जी छात्र संख्या दर्शाने का खेल किया गया। प्रारंभिक जांच के दौरान कई मदरसों के दस्तावेज, उपस्थिति पंजिका और छात्र संख्या में भारी अंतर पाया गया। कुछ मदरसों में जिन बच्चों के नाम दर्ज थे, वे दूसरे मदरसों में भी छात्र के रूप में दर्ज मिले। इससे साफ हुआ कि सरकारी रिकॉर्ड में एक ही बच्चे को कई जगह दर्शाकर धनराशि लेने का प्रयास किया गया। जांच में यह भी सामने आया कि लक्सर क्षेत्र में तीन मदरसों की अनुमति के आधार पर अलग-अलग स्थानों पर कुल छह मदरसे संचालित किए जा रहे थे।
संचालक इन फर्जी मदरसों में पढ़ रहे छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ तो कर ही रहे हैं, साथ ही होनहार बच्चों का भविष्य भी दाव पर लगा रहे हैं। हालांकि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी सरकार इन अवैध मदरसों पर नकेल कस रही है, लेकिन सरकार के नुमाइंदे इस पर लगाम लगाने मे कब सफल होंगे, यह देखना दिलचस्प होगा!








