देहरादून। उत्तराखंड के बहुचर्चित UKSSSC VPDO भर्ती घोटाले में ED ने 9 साल बाद फिर शिकंजा कसा है और इस बार सीधे पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत के सबसे करीबी रहे चंदन सिंह जीना लपेटे में आ गए हैं।
कौन है चंदन सिंह जीना और कैसे फंसा
चंदन सिंह जीना का नाम उत्तराखंड की ब्यूरोक्रेसी और सियासत में नया नहीं है। 2014 से 2017 तक जब हरीश रावत मुख्यमंत्री थे, तब जीना उनके OSD और फर्स्ट PA के तौर पर हर फैसले में साथ रहते थे। उन्हें हरीश रावत का सबसे भरोसेमंद सिपहसालार माना जाता था।

ED ने 10 सितंबर को VPDO परीक्षा-2016 में OMR शीट में गड़बड़ी और मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में जो FIR विजिलेंस थाने में दर्ज है, उसके आधार पर छापेमारी की। आरोप है कि परीक्षा की OMR शीट प्रोसेस करने वाली प्राइवेट कंपनी के साथ मिलकर रिजल्ट में सेटिंग की गई थी। इसी पैसे के लेनदेन की कड़ी चंदन जीना तक जुड़ी।
तलाशी में ED को जीना के घर से 32 लाख रुपये नकद, 200.5 ग्राम सोना और 12 महंगी ब्रांडेड घड़ियां मिली हैं, जिसका हिसाब वह नहीं दे पाए।
हरीश रावत से क्या संबंध है?
हरीश रावत कांग्रेस के कद्दावर नेता हैं और चंदन जीना उनके मुख्यमंत्री कार्यकाल में उनके OSD थे। मतलब मुख्यमंत्री कार्यालय का हर दस्तावेज और हर नियुक्ति से जुड़ी फाइल इन्हीं के हाथों से गुजरती थी। इसलिए UKSSSC भर्ती में गड़बड़ी के तार सीधे सीएम ऑफिस से जुड़े होने का शक ED को है।
त्रिवेंद्र सिंह रावत का नाम क्यों आ रहा है?
त्रिवेंद्र सिंह रावत भाजपा के वरिष्ठ नेता, उत्तराखंड के पूर्व CM और हरिद्वार के मौजूदा सांसद हैं। जब 2017 में त्रिवेंद्र CM बने थे, तब उन्होंने हरीश रावत सरकार के समय के भर्ती घोटालों और स्टिंग ऑपरेशन के मामलों की जांच के आदेश दिए थे। उस वक्त भी हरीश रावत के करीबियों पर कार्रवाई हुई थी।
अब उसी कड़ी में 9 साल पुराने VPDO घोटाले में ED की एंट्री को भाजपा, हरीश रावत सरकार के भ्रष्टाचार के सबूत के तौर पर पेश कर रही है।








