उत्तराखंड विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा हाईकमान ने अपने विधायकों को प्रदर्शन सुधारने का एक और मौका दिया है। पार्टी ने सभी विधायकों को 31 अक्टूबर तक लगातार जनता के बीच रहने के साथ घोषणाओं को जमीन पर उतारने समेत लंबित विकास कार्यों को तेजी से पूरा कराने के निर्देश दिए हैं।
पार्टी सूत्रों के अनुसार, विधायकों को अपने क्षेत्रों के विकास कार्यों के लिए मुख्यमंत्री और मंत्रियों के साथ नियमित संपर्क बनाए रखने के लिए कहा गया है, ताकि सरकारी योजनाओं में तेजी लाई जा सके। भाजपा नेतृत्व विधायकों के इन छह महीनों के प्रदर्शन का मूल्यांकन नवंबर-दिसंबर में दो नए सर्वे के जरिए करेगा। इसी रिपोर्ट को टिकट वितरण का अंतिम आधार माना जाएगा। भाजपा के एक वरिष्ठ नेता ने इसकी पुष्टि करते हुए कहा कि पार्टी फिलहाल किसी भी मौजूदा विधायक का टिकट काटने के पक्ष में नहीं है, लेकिन अंतिम फैसला जीत की संभावना के आधार पर ही तरा किया जा सकेगा।
अब तक तीन सर्वे
उत्तराखंड में अगले साल होने जा रहे विधानसभा चुनावों के लिए भाजपा अपनी तैयारी शुरू कर चुकी है। विभिन्न स्तरों पर अब तक करवाए गए तीन सर्वे में भाजपा की संभावनाएं तो मजबूत मानी जा रही हैं, लेकिन कुछ विधायकों के खिलाफ एंटी इंकमबेंसी का असर भी पाया गया है और इनकी संख्या बारह से अधिक बताई गई है।
कमजोर सीटों के साथ कांग्रेस के गढ़ पर भी फोकस
भाजपा संगठन को वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में कम अंतर से जीती। ऐसे में हारी हुई सीटों पर विशेष फोकस करने को कहा गया है। श्रीनगर, टिहरी, गदरपुर और नरेंद्रनगर जैसी सीटों पर भाजपा की जीत का अंतर 587 से 1798 वोट तक ही रहा था। चकराता, भगवानपुर, पिरान कलियर और धारचूला जैसी सीटें भाजपा अब तक नहीं जीत पाई है। पार्टी संगठन को कांग्रेस के मजबूत गढ़ और कम अंतर से जीती सीटों पर भी रणनीतिक तरीके से काम करने के निर्देश दिए गए हैं।






