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बड़ी खबर : हरिद्वार में गंगा की धारा बदलने के बाद उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश में गहराया सीमा विवाद

February 4, 2026
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बड़ी खबर : हरिद्वार में गंगा की धारा बदलने के बाद उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश में गहराया सीमा विवाद
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हाई कोर्ट ने उत्तर प्रदेश की सीमा से सटे उत्तराखंड के हरिद्वार जिले के कई गांवों से होकर बहने वाली गंगा नदी की धारा परिवर्तित होने के कारण उपजे सीमा विवाद के निर्धारण करने को दायर याचिका पर सुनवाई की।

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सरकार बहादुर पार्ट 3 : उत्तराखंड की बेटा सायरा सरकार की नितियों से परेशान, सोशल मीडिया पर हो रहा वीडियो वायरल  देहरादून। उत्तराखंड की बेटी सायर ने नेशनल ताइक्वांडो चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल जीतकर पूरे राज्य का सिर गर्व से ऊंचा कर दिया। देहरादून के CNI Girls School की कक्षा 12 की छात्रा सायरा ने अपनी मेहनत से इंटरनेशनल स्पर्धा के लिए भी क्वालीफाई किया। लेकिन सरकार की गलत नीतियों और उदासीनता की वजह से उसका सपना अधूरा रह गया।  10 अगस्त 2026 को देहरादून में हुए ‘मुख्यमंत्री युवा विद्यार्थी मंथन’ कार्यक्रम में जब सायरा मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के सामने पहुंची तो उसकी आंखें भर आईं। उसने बताया कि इंटरनेशनल टूर्नामेंट में जाने के लिए डेढ़ लाख रुपये चाहिए थे। घर की हालत ऐसी नहीं थी कि इतनी रकम जुटा पाती। नतीजा ये हुआ कि देश के लिए खेलने का मौका हाथ से चला गया।  यही है सरकार की “खेल नीति” की सच्चाई। एक तरफ ढोल पीटा जाता है “खेलो इंडिया” का, दूसरी तरफ गोल्ड मेडलिस्ट खिलाड़ी को बुनियादी मदद के लिए भी तरसना पड़ता है। सायरा के जिले में आज तक एक भी सरकारी ताइक्वांडो सेंटर नहीं बना। प्रैक्टिस के लिए हर महीने 8000 रुपये प्राइवेट हॉल को देने पड़ते हैं। बरसात में सरकारी स्टेडियम बंद रहते हैं या वीआईपी के नाम बुक रहते हैं। नेशनल के बाद मिलने वाला यात्रा भत्ता और प्रोत्साहन राशि आज भी फाइलों में अटकी है।  सायरा के माता-पिता ने कर्ज लेकर बेटी को नेशनल तक पहुंचाया। उन्हें उम्मीद थी सरकार सहयोग करेगी। लेकिन जब मदद मांगी तो जवाब मिला बजट नहीं है। वहीं जीत के बाद अफसर और नेता फोटो खिंचवाकर “बेटी बचाओ” का भाषण दे देते हैं।  सायरा का सवाल सरकार से सीधा है। अगर एक नेशनल गोल्ड मेडलिस्ट को डेढ़ लाख की कमी के कारण पीछे बैठना पड़े तो आम खिलाड़ी क्या करेगा? खिलाड़ियों और अभिभावकों की मांग है कि तुरंत हर जिले में फ्री कोचिंग, समय पर किट और भत्ता, और इंटरनेशनल जाने वाले खिलाड़ियों के लिए फंड की व्यवस्था हो।  साफ है सरकार को मेडल से मतलब है, खिलाड़ी से नहीं। जब तक नीतियां कागजों तक सीमित रहेंगी, सायरा जैसी बेटियां गोल्ड जीतकर भी अपने सपने बेचने को मजबूर रहेंगी। सायरा एक एनसीसी कैडेट भी है, सरकार खिलाड़ियों को आगे बढ़ाने के खोखले दावे करती है, इन दावों में कितना दम है यह धरातल पर पता चल रहा है।

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न्यायमूर्ति सिद्धार्थ शाह की पीठ ने जिलाधिकारी हरिद्वार को ग्रामीणों की ओर से कृषि करने को लेकर दिए गए प्रत्यावेदनों पर छह सप्ताह के भीतर निर्णय लेने के निर्देश दिए हैं, ताकि ग्रामीण अपने कृषि कार्य कर सके। कोर्ट ने मामले में राज्य सरकार को चार सप्ताह में जवाब पेश करने को कहा है। मामले की अगली सुनवाई को छह सप्ताह बाद की तिथि नियत की है।

उत्तर प्रदेश की सीमा से सटे हरिद्वार के ग्राम रायपुर, रायघाटी ,काबुलपुरी, भिकंपुर,जीतपुर व अन्य ग्रामों के ग्रामीणों ने याचिका दायर कर कहा है कि उनके ग्रामों से होकर गंगा नदी बहती थी लेकिन अब गंगा नदी की धारा परिवर्तित होने के कारण उनकी कृषि योग्य भूमि की सीमा बदल गयी है। जिसके कारण उत्तर प्रदेश व उत्तराखंड का सीमा विवाद खड़ा हो गया है। सीमा विवाद होने कारण उतर प्रदेश वन प्रभाग उन्हें कृषि कार्य नहीं करने दे रहा है। जिसकी वजह से उनकी आर्थिक स्थिति कमजोर हो गयी है।

याचिका में कहा गया है कि सीमा विवाद सुलझाने के लिए कई बार राजस्व विभाग को प्रत्यावेदन दिए गए मगर कोई हल नही निकाला गया। ग्रामीणों का यह भी कहना है कि सीमा विवाद को सुझाने के लिए दोनों राज्यों के राजस्व अधिकारियों की संयुक्त टीम गठित कर सीमा का निर्धारण किया जाए।

साथ ही सीमा निर्धारित करने के लिए पीलर लगाए जाएं ताकि बेरोकटोक अपनी कृषि कार्य कर सकें। कृषि कार्य करने के लिए पुलिस बल उनको मुहैय्या कराई जाय। पूर्व में दिए प्रत्यावेदनों पर शीघ्र सुनवाई करने के आदेश उत्तर प्रदेश व उत्तराखंड के राजस्व विभाग को दिए जाएं और उन्हें कृषि कार्य करने की अनुमति भी दी जाए।

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