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उत्तराखंड : देहरादून के 70 लोको रेलवे पायलट आज से भूख हड़ताल पर

December 2, 2025
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उत्तराखंड : देहरादून के 70 लोको रेलवे पायलट आज से भूख हड़ताल पर
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देहरादून रेलवे स्टेशन के करीब 70 लोको पायलट अपनी मांगों को लेकर आज से आगामी 48 घंटों तक सामूहिक उपवास (भूख हड़ताल )पर रहेंगे। उपवास की अवधि में रनिंग रूम में खाना नहीं पकाया जाएगा, लेकिन रेलवे प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि इस आंदोलन का नियमित ट्रेन संचालन पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। सभी लोको पायलट अपने-अपने कर्तव्यों का निर्वहन करते हुए उपवास जारी रखेंगे।

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सरकार बहादुर पार्ट 3 : उत्तराखंड की बेटा सायरा सरकार की नितियों से परेशान, सोशल मीडिया पर हो रहा वीडियो वायरल  देहरादून। उत्तराखंड की बेटी सायर ने नेशनल ताइक्वांडो चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल जीतकर पूरे राज्य का सिर गर्व से ऊंचा कर दिया। देहरादून के CNI Girls School की कक्षा 12 की छात्रा सायरा ने अपनी मेहनत से इंटरनेशनल स्पर्धा के लिए भी क्वालीफाई किया। लेकिन सरकार की गलत नीतियों और उदासीनता की वजह से उसका सपना अधूरा रह गया।  10 अगस्त 2026 को देहरादून में हुए ‘मुख्यमंत्री युवा विद्यार्थी मंथन’ कार्यक्रम में जब सायरा मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के सामने पहुंची तो उसकी आंखें भर आईं। उसने बताया कि इंटरनेशनल टूर्नामेंट में जाने के लिए डेढ़ लाख रुपये चाहिए थे। घर की हालत ऐसी नहीं थी कि इतनी रकम जुटा पाती। नतीजा ये हुआ कि देश के लिए खेलने का मौका हाथ से चला गया।  यही है सरकार की “खेल नीति” की सच्चाई। एक तरफ ढोल पीटा जाता है “खेलो इंडिया” का, दूसरी तरफ गोल्ड मेडलिस्ट खिलाड़ी को बुनियादी मदद के लिए भी तरसना पड़ता है। सायरा के जिले में आज तक एक भी सरकारी ताइक्वांडो सेंटर नहीं बना। प्रैक्टिस के लिए हर महीने 8000 रुपये प्राइवेट हॉल को देने पड़ते हैं। बरसात में सरकारी स्टेडियम बंद रहते हैं या वीआईपी के नाम बुक रहते हैं। नेशनल के बाद मिलने वाला यात्रा भत्ता और प्रोत्साहन राशि आज भी फाइलों में अटकी है।  सायरा के माता-पिता ने कर्ज लेकर बेटी को नेशनल तक पहुंचाया। उन्हें उम्मीद थी सरकार सहयोग करेगी। लेकिन जब मदद मांगी तो जवाब मिला बजट नहीं है। वहीं जीत के बाद अफसर और नेता फोटो खिंचवाकर “बेटी बचाओ” का भाषण दे देते हैं।  सायरा का सवाल सरकार से सीधा है। अगर एक नेशनल गोल्ड मेडलिस्ट को डेढ़ लाख की कमी के कारण पीछे बैठना पड़े तो आम खिलाड़ी क्या करेगा? खिलाड़ियों और अभिभावकों की मांग है कि तुरंत हर जिले में फ्री कोचिंग, समय पर किट और भत्ता, और इंटरनेशनल जाने वाले खिलाड़ियों के लिए फंड की व्यवस्था हो।  साफ है सरकार को मेडल से मतलब है, खिलाड़ी से नहीं। जब तक नीतियां कागजों तक सीमित रहेंगी, सायरा जैसी बेटियां गोल्ड जीतकर भी अपने सपने बेचने को मजबूर रहेंगी। सायरा एक एनसीसी कैडेट भी है, सरकार खिलाड़ियों को आगे बढ़ाने के खोखले दावे करती है, इन दावों में कितना दम है यह धरातल पर पता चल रहा है।

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विनोद कुमार ने कहा कि वर्तमान समय में लोको पायलट की संख्या जरूरत से कम है, जिसके कारण कर्मचारियों को पर्याप्त विश्राम नहीं मिल पा रहा है। यह स्थिति न केवल कार्य दक्षता को प्रभावित करती है बल्कि सुरक्षा के दृष्टिकोण से भी चुनौतीपूर्ण है। इसी के साथ उन्होंने यह भी बताया कि अब रेलवे के रनिंग स्टाफ में महिलाओं की संख्या बढ़ रही है, ऐसे में लोकोमोटिव इंजनों में शौचालय की अनुपस्थिति महिलाओं के लिए गंभीर परेशानी का कारण बन रही है। इस मुद्दे को कई बार उठाए जाने के बावजूद समाधान नहीं निकल पाया है, जिसके विरोध में यह शांतिपूर्ण उपवास शुरू किया जा रहा है।

एसोसिएशन ने स्पष्ट किया कि आंदोलन पूरी तरह शांतिपूर्ण रहेगा और रेलवे सेवाओं को बाधित किए बिना अपनी आवाज शासन-प्रशासन तक पहुंचाने का प्रयास किया जाएगा। लोको पायलटों का कहना है कि जब तक उनकी मांगों पर सकारात्मक पहल नहीं होती, तब तक आवाज उठाने का यह अभियान जारी रहेगा।

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