राजा भोज गंगू तेली की कहावतें आपने सुनी जरूर होगी। ऐसा ही मामला पूर्व मुख्यमंत्री और वर्तमान में हरिद्वार लोकसभा सीट से सांसद त्रिवेंद्र सिंह रावत अब बेतुका बयान बाजी कर रहे हैं।
अपने कार्यकाल के दौरान पत्रकारों को जेल भेजने से लेकर, कोरोना काल में बेरोजगारों के शोषण के आरोपी रहे पूर्व सीएम अब केशव थलवाल के मामले को लेकर वर्तमान धामी सरकार को घेर रहे हैं।
पूर्व सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत ने अपनी राय या नाराजगी जाहिर करते हुए सरकार और उत्तराखंड पुलिस को असहज किया है। उन्होंने कहा कि अगर वास्तिविकता है तो जांच होनी चाहिए।
“केशव थलवाल मामले में जरूर जांच होनी चाहिए। अगर केशव ने पुलिस पर जो आरोप लगाए हैं, वे सच हैं तो जांच होनी चाहिए। यदि आरोपों में वास्तविकता है, तो ऐसे पुलिसकर्मियों और अधिकारियों पर सरकार को कार्रवाई करनी चाहिए। क्योंकि इससे पुलिस की शाखा और सिस्टम पर सवाल उठा है”
ऐसे में घुमा फिरा कर पूर्व मुख्यमंत्री अपनी ही सरकार पर सवाल उठा रहे हैं, जबकि वह जानते हैं कि ग्रह मंत्रालय मुख्यमंत्री पुष्कर सह धामी के अधीन है।
उत्तरा बहुगुणा पंत प्रकरण को शायद माननीय बिसर गए।
तब भी इनकी सरकार थी और अब भी, हालांकि मुख्यमंत्री पद गंवाने के बाद माननीय गुस्से में है, जो कि खुलकर नहीं बोल पा रहे हैं। बाकी जनता समझदार है।











