ऋषिकेश। लंबे समय से फर्जी नियुक्तियों को लेकर उत्तराखंड सरकार का ‘लाडला’ एम्स अब फर्जी शिक्षकों के दस्तावेजों की जांच करेगा। हालांकि एम्स ऋषिकेश में फर्जी नियुक्तियों को लेकर मामला कई बार तूल पकड़ चुका है।
वह बात अलग है की ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस (Aiims) केंद्र सरकार के अधीन है।
लेकिन सुविधाएं ग्रामीण स्तर पर भी नहीं हैं। दिखाने के लिए इनके पास हवा हवाई के नाम पर हेली एंबुलेंस है।
अधिकारियों से लेकर तमाम स्टाफ समेत पार्किंग और कैंटीन पर पद जमानें वालों पर तमाम आरोप लग चुके हैं।
ऐसे में अब उत्तराखंड के शिक्षा विभाग में दिव्यांगता प्रमाण पत्रों को लेकर उठे विवाद ने एक बार फिर तूल पकड़ लिया है। पहले विभागीय जांच में 52 प्रवक्ताओं के दिव्यांगता प्रमाण पत्र संदिग्ध या फर्जी पाए जाने के बाद अब सरकार ने पूरे मामले की व्यापक जांच कराने का निर्णय लिया है।
इसी क्रम में राज्य भर के सभी 234 प्रवक्ताओं के दिव्यांगता प्रमाण पत्रों की दोबारा मेडिकल जांच कराने का फैसला किया गया है। यह जांच एम्स ऋषिकेश के मेडिकल बोर्ड द्वारा की जाएगी।
शिक्षा महानिदेशक दीप्ति सिंह ने बताया कि, न्यायालय के निर्देशों के आधार पर यह कदम उठाया गया है। जिन प्रवक्ताओं ने दिव्यांगता के आधार पर सेवा में लाभ लिया है, उनकी वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने के लिए मेडिकल परीक्षण कराया जाएगा।
इसके लिए स्वास्थ्य परीक्षण की प्रक्रिया 7 मार्च से शुरू होगी, जबकि अन्य तिथियों में 12 मार्च, 14 मार्च, 28 मार्च और 2 अप्रैल को भी एम्स ऋषिकेश में मेडिकल बोर्ड जांच करेगा।
गौरतलब है कि इस मामले को सबसे पहले नेशनल फेडरेशन ऑफ द ब्लाइंड ने उठाया था। संगठन ने आरोप लगाया था कि कई शिक्षक फर्जी दिव्यांगता प्रमाण पत्र के आधार पर नौकरी और अन्य लाभ ले रहे हैं।
अब ऐसे में एम्स ऋषिकेश क्या भूमिका निभाता है, यह देखना दिलचस्प होगा!










