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गजब : मजदूर दिवस पर ‘संवाद न्यूज एजेंसी’ ने अपने कर्मचारियों को महज 175 रूपए का इन्क्रीमेंट दिया

May 8, 2026
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विशेष : कॉपी पेस्ट पत्रकारों के लिए विशेष जानकारी, कैसे आप कॉपी पेस्ट कर अपनी कंपनी को नुकसान पहुंचा रहे हैं
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बाजार से करोड़ों रुपए का हर माह विज्ञापन बटोरने वाले अखबार में कार्य करने वाले एंप्लॉई इस वक्त नींबू खरीदने के लायक नहीं रहा गए है। एक बड़े अखबार, जो कि एक एजेंसी के माध्यम से अपनी खबरों को प्रकाशित करता है, उसने अपने एम्पलाई को मई माह में 175 रुपये का इंक्रीमेंट दिया है।

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सरकार बहादुर पार्ट 3 : उत्तराखंड की बेटा सायरा सरकार की नितियों से परेशान, सोशल मीडिया पर हो रहा वीडियो वायरल  देहरादून। उत्तराखंड की बेटी सायर ने नेशनल ताइक्वांडो चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल जीतकर पूरे राज्य का सिर गर्व से ऊंचा कर दिया। देहरादून के CNI Girls School की कक्षा 12 की छात्रा सायरा ने अपनी मेहनत से इंटरनेशनल स्पर्धा के लिए भी क्वालीफाई किया। लेकिन सरकार की गलत नीतियों और उदासीनता की वजह से उसका सपना अधूरा रह गया।  10 अगस्त 2026 को देहरादून में हुए ‘मुख्यमंत्री युवा विद्यार्थी मंथन’ कार्यक्रम में जब सायरा मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के सामने पहुंची तो उसकी आंखें भर आईं। उसने बताया कि इंटरनेशनल टूर्नामेंट में जाने के लिए डेढ़ लाख रुपये चाहिए थे। घर की हालत ऐसी नहीं थी कि इतनी रकम जुटा पाती। नतीजा ये हुआ कि देश के लिए खेलने का मौका हाथ से चला गया।  यही है सरकार की “खेल नीति” की सच्चाई। एक तरफ ढोल पीटा जाता है “खेलो इंडिया” का, दूसरी तरफ गोल्ड मेडलिस्ट खिलाड़ी को बुनियादी मदद के लिए भी तरसना पड़ता है। सायरा के जिले में आज तक एक भी सरकारी ताइक्वांडो सेंटर नहीं बना। प्रैक्टिस के लिए हर महीने 8000 रुपये प्राइवेट हॉल को देने पड़ते हैं। बरसात में सरकारी स्टेडियम बंद रहते हैं या वीआईपी के नाम बुक रहते हैं। नेशनल के बाद मिलने वाला यात्रा भत्ता और प्रोत्साहन राशि आज भी फाइलों में अटकी है।  सायरा के माता-पिता ने कर्ज लेकर बेटी को नेशनल तक पहुंचाया। उन्हें उम्मीद थी सरकार सहयोग करेगी। लेकिन जब मदद मांगी तो जवाब मिला बजट नहीं है। वहीं जीत के बाद अफसर और नेता फोटो खिंचवाकर “बेटी बचाओ” का भाषण दे देते हैं।  सायरा का सवाल सरकार से सीधा है। अगर एक नेशनल गोल्ड मेडलिस्ट को डेढ़ लाख की कमी के कारण पीछे बैठना पड़े तो आम खिलाड़ी क्या करेगा? खिलाड़ियों और अभिभावकों की मांग है कि तुरंत हर जिले में फ्री कोचिंग, समय पर किट और भत्ता, और इंटरनेशनल जाने वाले खिलाड़ियों के लिए फंड की व्यवस्था हो।  साफ है सरकार को मेडल से मतलब है, खिलाड़ी से नहीं। जब तक नीतियां कागजों तक सीमित रहेंगी, सायरा जैसी बेटियां गोल्ड जीतकर भी अपने सपने बेचने को मजबूर रहेंगी। सायरा एक एनसीसी कैडेट भी है, सरकार खिलाड़ियों को आगे बढ़ाने के खोखले दावे करती है, इन दावों में कितना दम है यह धरातल पर पता चल रहा है।

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जोश के साथ सच की आवाज उठाने वाले अखबार के एम्प्लॉई का होगा इंक्रिमेंट के बाद से ठंडा पड़ा गया है। अप्रैल माह की तनख्वाह से साथ कंपनी की ओर से पत्रकारों को इंक्रीमेंट का तोहफा दिया गया।

लोगों को उम्मीद थी विभिन्न आयोजनों के जरिए करोड़ों रुपए बटोरने वाले अखबार में भी अच्छी इंक्रीमेंट मिलेगा, लेकिन जब एक मई को मजदूर दिवस वाले दिन तनख्वाह आई तो पुरानी और नई तनख्वाह में 175 की बढ़ोतरी देखकर पत्रकार हैरान रह गए। लोगों के मुंह से निकल गया कि जिस दौर में 15 रुपये में एक नींबू मिल रहा है, उस समय में 175 रुपए का इंक्रीमेंट बताता है कि जीवन में खाना पीना छोड़ कर सिर्फ नींबू पीजिए और लगे रहिए अखबार को आगे बढ़ाने में …

बनारस यूनिट से जुड़े ब्यूरो कार्यालय में कर्मियों की तनख्वाह वृद्धि को लेकर तमाम उपहास भी कर्मचारी आपस में उड़ा रहे हैं। विरोध के स्वर उठाने नौकरी से निकाल दिए जाने के डर भले ही एंप्लॉई आवाज ना उठाते लेकिन कंपनी के अधिकारियों लानत दे रहे है। सवाल कर रहे हैं जो तनख्वाह या मानदेय आज दिया जा रहा है क्या वाकई में लोग अपने परिवार का पेट पाल सकेंगे। कहां से सच के लिए जोश लेकर आयेंगे!

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