रिपोर्ट -हरीश चन्द्र
रूद्रप्रयाग/ऊखीमठ बद्री केदार मन्दिर समिति के अधीन विश्वनाथ मंदिर गुप्तकाशी में पुजारी के नियुक्ति के मामले में बीकेटीसी और केदारनाथ रावल के बीच विवाद की स्थिति पैदा हो गई है।
बता दें कि केदारनाथ रावल भीमाशंकर लिंग ने बीकेटीसी के आदेश को परम्परा के खिलाफ बताते हुए तीन दिन में आदेश निरस्त न करने पर आमरण अनशन की चेतावनी दी है।
उन्होंने प्रधानमंत्री, टिहरी नरेश और बीकेटीसी के सीईओ को भी पत्र लिखकर कार्यवाही करने की मांग की है, जबकि वीआईपी पर खर्चो को लेकर हाल में चर्चाओं में आई बद्री केदार मंदिर समिति अब रावल के विवाद में एक बार फिर से चर्चा में है।
बता दें कि बद्री केदार मन्दिर समिति ने 27 मई 2026 को गुप्तकाशी विश्वनाथ मंदिर में ईश्वर लिंग को पुजारी नियुक्त करने का आदेश पारित किया, वहीं केदारनाथ रावल भीमाशंकर लिंग ने इस आदेश पर आपत्ति जताते हुए इसे परम्परा के विपरीत ही नहीं बताया, बल्कि रावल पद की गरिमा के विपरीत बताया है, केदारनाथ रावल ने बीकेटीसी के मुख्य कार्याधिकारी के साथ ही प्रधानमंत्री और टिहरी नरेश को पत्र लिखते हुए इस पर तत्काल कार्यवाही करने को कहा गया है। पत्र में रावल ने कहा कि परम्परा के अनुसार केदारनाथ के पंचपुजारीगण को पूजा का अधिकार है, जिसमें वर्ष 2023 से पंचपुजारियों में एक पद रिक्त हुआ था, जिसके लिए परम्परा के नियमानुसार बनाया गया चेला शांत लिंग को नियुक्त करने के लिए उनके द्वारा दो साल से कई बार बीकेटीसी को पत्र दिया गया। जिसमें कानूनी विलम्ब के कारण अस्थाई रुप से शांत लिंग गुप्तकाशी में कार्यरत थे, वहीं बीकेटीसी द्वारा अचानक परम्परा के विपरीत रावल की संस्तुति के बिना ही ईश्वरलिंग को पुजारी नियुक्त किया गया।
यह पूरी तरह परम्परा के खिलाफ है उन्होंने कहा कि वह 70 वर्ष के हो गए हैं और शारीरिक एवं मानसिक रूप से अस्वस्थ हो रहें हैं, ऐसे में यदि तीन दिन के भीतर आदेश निरस्त नहीं किया गया तो उनके शरीर से सम्बंधी कोई परिणाम उपजा तो उसके लिए बीकेटीसी जिम्मेदारी होगी साथ ही चेतावनी दी है कि यदि तीन दिन में आदेश निरस्त नहीं किया गया तो वे पंच गद्दी स्थल ओंकारेश्वर मंदिर ऊखीमठ में आमरण अनशन के लिए वाध्य होंगे।
इधर बद्री केदार मन्दिर के मुख्य कार्याधिकारी सोहन सिंह रांगण ने बताया कि बीकेटीसी की बोर्ड बैठक के बाद यह फैसला लिया गया है। उन्होंने कहा कि नियुक्ति का अधिकार बीकेटीसी को ही है जबकि पूजा का अधिकार पुजारीगणों को है रावल जी के दिशा निर्देशों में होने वाली पूजा की परम्परा से छेड़छाड़ नहीं किया गया है।








