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देहरादून : आईएमए का गौरवशाली इतिहास, आज होंगे 534 केडेट्स पास आउट, मित्र देशों के 34 केडेट्स भी शामिल

December 13, 2025
in एक्सक्लूसिव
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देहरादून : आईएमए की पासिंग आउट परेड के चलते 6 से 12 दिसंबर तक ट्रैफिक रहेगा डाइवर्ट, जानिए नया ट्रैफिक प्लान
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देहरादून। भारतीय सैन्य अकादमी में शनिवार 13 दिसंबर को होने वाली पासिंग आउट परेड की सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। इस भव्य समारोह के साथ भारतीय सेना को 491 प्रशिक्षित युवा अफसर मिलने जा रहे हैं। खास बात यह है कि इस बार परेड के दौरान स्वयं सेना प्रमुख रिव्यूइंग ऑफिसर के रूप में मौजूद रहेंगे, जो पास आउट हो रहे कैडेट्स के लिए एक यादगार और गौरवपूर्ण क्षण होगा।

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कठोर प्रशिक्षण, अनुशासन और निरंतर संघर्ष के बाद ये ऑफिसर्स कैडेट्स उस मुकाम तक पहुंचे हैं, जिसका सपना उन्होंने वर्षों पहले देखा था। देश के अलग अलग हिस्सों से आए इन युवाओं ने अकादमी में कठिन प्रशिक्षण पूरा कर भारतीय सेना का हिस्सा बनने की पात्रता हासिल की है।

यहां से ट्रेनिंग पूरी होने के बाद 525 जांबाज जेंटलमैन कैडेट शनिवार को पासिंग आउट परेड (पीओपी) में कदमताल करेंगे। इनमें से 491 कैडेट बतौर लेफ्टिनेंट भारतीय सेना में कमीशन होंगे

इस पासिंग आउट परेड में सिर्फ भारतीय कैडेट्स ही नहीं, बल्कि 14 मित्र देशों के 34 कैडेट्स भी प्रशिक्षण पूर्ण कर अकादमी से विदा लेंगे। इस तरह कुल 525 कैडेट्स भारतीय सैन्य अकादमी से पास आउट होकर अपने अपने देशों की सेनाओं में सेवाएं देंगे।

भारतीय सैन्य अकादमी के इतिहास में यह एक और महत्वपूर्ण अध्याय जुड़ने जा रहा है। वर्ष 1932 में स्थापित यह प्रतिष्ठित संस्थान अब तक लगभग 67 हजार से अधिक ऑफिसर्स कैडेट्स को प्रशिक्षित कर भारतीय सेना को समर्पित कर चुका है। करीब 93 वर्षों से अकादमी उसी अनुशासन, परंपरा और संकल्प के साथ देश की रक्षा के लिए नेतृत्व तैयार कर रही हैं।

इस बार के बैच के लिए यह अवसर इसलिए भी विशेष है, क्योंकि जिस सेना का वे हिस्सा बनने जा रहे हैं, उसके प्रमुख स्वयं उनके सामने मौजूद रहेंगे और उन्हें मार्गदर्शन देंगे। यह पल न केवल कैडेट्स बल्कि उनके परिवारों और पूरे देश के लिए गर्व का विषय होगा।

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सरकार बहादुर पार्ट 3 : उत्तराखंड की बेटा सायरा सरकार की नितियों से परेशान, सोशल मीडिया पर हो रहा वीडियो वायरल  देहरादून। उत्तराखंड की बेटी सायर ने नेशनल ताइक्वांडो चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल जीतकर पूरे राज्य का सिर गर्व से ऊंचा कर दिया। देहरादून के CNI Girls School की कक्षा 12 की छात्रा सायरा ने अपनी मेहनत से इंटरनेशनल स्पर्धा के लिए भी क्वालीफाई किया। लेकिन सरकार की गलत नीतियों और उदासीनता की वजह से उसका सपना अधूरा रह गया।  10 अगस्त 2026 को देहरादून में हुए ‘मुख्यमंत्री युवा विद्यार्थी मंथन’ कार्यक्रम में जब सायरा मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के सामने पहुंची तो उसकी आंखें भर आईं। उसने बताया कि इंटरनेशनल टूर्नामेंट में जाने के लिए डेढ़ लाख रुपये चाहिए थे। घर की हालत ऐसी नहीं थी कि इतनी रकम जुटा पाती। नतीजा ये हुआ कि देश के लिए खेलने का मौका हाथ से चला गया।  यही है सरकार की “खेल नीति” की सच्चाई। एक तरफ ढोल पीटा जाता है “खेलो इंडिया” का, दूसरी तरफ गोल्ड मेडलिस्ट खिलाड़ी को बुनियादी मदद के लिए भी तरसना पड़ता है। सायरा के जिले में आज तक एक भी सरकारी ताइक्वांडो सेंटर नहीं बना। प्रैक्टिस के लिए हर महीने 8000 रुपये प्राइवेट हॉल को देने पड़ते हैं। बरसात में सरकारी स्टेडियम बंद रहते हैं या वीआईपी के नाम बुक रहते हैं। नेशनल के बाद मिलने वाला यात्रा भत्ता और प्रोत्साहन राशि आज भी फाइलों में अटकी है।  सायरा के माता-पिता ने कर्ज लेकर बेटी को नेशनल तक पहुंचाया। उन्हें उम्मीद थी सरकार सहयोग करेगी। लेकिन जब मदद मांगी तो जवाब मिला बजट नहीं है। वहीं जीत के बाद अफसर और नेता फोटो खिंचवाकर “बेटी बचाओ” का भाषण दे देते हैं।  सायरा का सवाल सरकार से सीधा है। अगर एक नेशनल गोल्ड मेडलिस्ट को डेढ़ लाख की कमी के कारण पीछे बैठना पड़े तो आम खिलाड़ी क्या करेगा? खिलाड़ियों और अभिभावकों की मांग है कि तुरंत हर जिले में फ्री कोचिंग, समय पर किट और भत्ता, और इंटरनेशनल जाने वाले खिलाड़ियों के लिए फंड की व्यवस्था हो।  साफ है सरकार को मेडल से मतलब है, खिलाड़ी से नहीं। जब तक नीतियां कागजों तक सीमित रहेंगी, सायरा जैसी बेटियां गोल्ड जीतकर भी अपने सपने बेचने को मजबूर रहेंगी। सायरा एक एनसीसी कैडेट भी है, सरकार खिलाड़ियों को आगे बढ़ाने के खोखले दावे करती है, इन दावों में कितना दम है यह धरातल पर पता चल रहा है।

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