नैनीताल। अवैध कोचिंग सेंटरों और रिहायशी क्षेत्रों में व्यावसायिक गतिविधियों के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने उत्तराखंड सरकार के रवैये पर कड़ी नाराजगी जताई है। सुनवाई के दौरान न्याय मित्र ने कोर्ट को बताया कि उत्तराखंड ने न तो कार्रवाई में हिस्सा लिया और न ही 50,000 रुपये जमा किए। साथ ही कोई शपथपत्र भी दाखिल नहीं किया।
इस पर जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और जस्टिस आर महादेवन की खंडपीठ ने सरकार के रवैये पर गंभीर आपत्ति दर्ज करते हुए मुख्य सचिव को अवमानना का नोटिस जारी किया है। उन्हें अगली सुनवाई तिथि 23 नवंबर को कोर्ट में पेश होने का निर्देश दिया गया है।
22 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट देशभर के कमर्शियल इलाकों में चल रहे कोचिंग सेंटरों से जुड़े एक मामले की सुनवाई कर रहा था। कोर्ट ने कहा था कि इन सेंटरों को सरकार की ओर से तय इलाकों में शिफ्ट किया जाना था।
कोर्ट ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि रिहायशी इस्तेमाल के लिए तय इलाकों में कोई कमर्शियल गतिविधि न हो। अगर ऐसे इलाकों में कमर्शियल गतिविधि पाई जाती है तो उस जगह को सबसे पहले सील किया जाएगा।







