देहरादून। राज्य के पूर्व मुख्य सचिव एस. रामास्वामी के बेटे यशोवर्धन के खिलाफ बुधवार को 15 लाख रुपये की धोखाधड़ी और फर्जी पहचान बताने का मुकदमा दर्ज हुआ है। पुलिस मामले की जांच कर रही है।
राजपुर थानाध्यक्ष पीडी भट्ट के अनुसार गढ़ी कैंट निवासी अंशुल उपाध्याय ने तहरीर दी। उनका आरोप है कि मार्च में यशोवर्धन से मुलाकात हुई थी। आरोपी ने खुद को केंद्र सरकार की गुप्त एजेंसियों और स्पेशल ऑपरेशंस ग्रुप से जुड़ा अफसर बताया।
यशोवर्धन ने अंशुल को उनकी दिवंगत मां के नाम पर `सुमन हेल्थ एंड ब्लेसिंग्स`, `हाउज द होस` और `यूरेका फ्राग्स` कंपनियों का पंजीकरण कराने और स्टार्टअप इंडिया के तहत 20-25 लाख की फंडिंग दिलाने का झांसा दिया।
आरोप है कि राजपुर रोड स्थित होटल जिंजर में बुलाकर पंजीकरण के नाम पर प्रति कंपनी 36 हजार रुपये लिए। कस्टम विभाग से सस्ते आईफोन दिलाने के नाम पर 2 लाख रुपये और लिए। कुल 15 लाख रुपये की ठगी हुई। वादे पूरे न होने पर पैसे मांगे तो आरोपी ने नंबर ब्लॉक कर दिए।
पहले भी बन चुका था “इंटेलिजेंस अफसर”
यशोवर्धन का विवादों से पुराना नाता है। पहले लैपटॉप चोरी होने पर उसने खुद को केंद्र की विशेष इंटेलिजेंस टीम का अफसर बताया था। तब पुलिस ने आनन-फानन में लैपटॉप ढूंढा था।
पूर्व विधायक प्रणव सिंह चैंपियन के बेटे से विवाद में भी उसने कपड़ों पर अशोक स्तंभ लगा होने का दावा कर खुद को बड़ा अफसर बताया था। वह खुद की तैनाती मसूरी में बताता था।
पुलिस ने धोखाधड़ी की धाराओं में केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।








