पौड़ी / खिर्सू। जहाँ लोग गोबर को गंदगी समझकर फेंक देते हैं, वहीं पौड़ी के खिर्सू ब्लॉक की महिलाओं ने उसी गोबर से अपनी किस्मत बदल दी है।
चमराड़ा इलाके के 25 गाँवों की करीब 450 महिलाओं ने मिलकर एक ऐसा काम शुरू किया है, जिसकी चर्चा अब पूरे उत्तराखंड में हो रही है। ये महिलाएं गाय के गोबर से धूप, हवन कप, दीपक और भगवान की मूर्तियां बनाती हैं।
पहले ये काम छोटे स्तर पर शुरू हुआ था। आज इनके बनाए हुए सामान पौड़ी से लेकर देहरादून तक के बाजारों में बिक रहे हैं। दिवाली के समय तो इनके पास इतने ऑर्डर आ गए कि महिलाओं को दिन-रात काम करना पड़ा। अब तक ये महिलाएं करीब सात लाख रुपये का सामान बेच चुकी हैं।
गोबर भी अब बिक रहा है 20 रुपये किलो
इस काम की सबसे खास बात ये है कि इससे सिर्फ बनाने वाली महिलाओं को ही नहीं, बल्कि गोबर बेचने वालों को भी फायदा हो रहा है। महिलाएं गाँव के लोगों से 20 रुपये प्रति किलो के हिसाब से गोबर खरीदती हैं। मतलब जो गोबर पहले बेकार था, वो अब घर-घर की कमाई बन गया है।
15 संगठनों ने मिलाया हाथ
ये पूरा काम ग्रामोत्थान परियोजना और भूमि स्वायत्त सहकारिता के साथ मिलकर चल रहा है। 15 ग्राम संगठनों की महिलाएं इसमें जुड़ी हुई हैं। हर महिला को उसके काम के हिसाब से पैसा मिलता है। किसी को बाहर जाने की जरूरत नहीं है, काम घर के पास ही मिल रहा है।
एक महिला ने बताया, “पहले हम घर के काम में ही लगे रहते थे। अब हमारा भी अपना पैसा है। बच्चों की फीस, घर का खर्च हम खुद निकाल लेते हैं। इससे बड़ा आत्मसम्मान और क्या होगा।”
महिलाओं का कहना है कि अब वो अपने सामान को ऑनलाइन भी बेचना चाहती हैं, ताकि पौड़ी का ये गोबर वाला दीपक पूरे देश में जाए।










