अल्मोड़ा / सोमेश्वर। पति गिरधारी लाल साहू से जुड़े प्रकरण के बाद कैबिनेट मंत्री और सोमेश्वर विधायक रेखा आर्या शुक्रवार को पहली बार अपने क्षेत्र में पहुंचीं। रामलीला मैदान में आयोजित जनसभा में वह मंच से भावुक हो गईं।
जनता को संबोधित करते हुए मंत्री ने कहा कि उनका जन्म सोमेश्वर के पोखरी सुनाड़ी में स्व. गोपाल राम आर्या और पुष्पा आर्या के घर हुआ है। उनका ननिहाल बिजोरिया में है और इन्हीं जड़ों ने उन्हें रेखा आर्या बनाया है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2003 में सोमेश्वर की जनता ने उन्हें निर्दलीय जिला पंचायत सदस्य चुनकर उनके राजनीतिक जीवन की शुरुआत की थी।
मंत्री ने कहा कि 2004 में उनका विवाह हुआ, लेकिन उन्होंने कभी भी अपने नाम के साथ ससुराल का नाम नहीं जोड़ा। वह शादी से पहले भी रेखा थीं और आज भी रेखा आर्या ही हैं। विवाह के बाद भी वह जनता के बीच रेखा आर्या के रूप में ही रहीं।
‘आज जिंदा हूं, नहीं तो पुष्पांजलि दे रहे होते’
रेखा आर्या ने कहा कि उन्हें कभी उम्मीद नहीं थी कि महिलाओं के हितों के लिए आवाज उठाने वाली उन्हें खुद ऐसी परिस्थितियों का सामना करना पड़ेगा। 2022 से जीवन में चल रही घटनाओं से लड़ने की ताकत उन्हें मायके से मिली।
उन्होंने आरोप लगाया कि आवाज उठाने पर उन्हें मारने तक की साजिश रची गई। मंच से उन्होंने कहा – “आज आपके आशीर्वाद से जिंदा हूं, नहीं तो आज आप मुझे पुष्पांजलि दे रहे होते।”
उन्होंने कहा कि घटनाक्रम के बाद उनमें चुनाव की तैयारी करने का साहस भी नहीं बचा था। उनके बारे में कहा गया कि वह एक सूट और पांच रुपये लेकर सड़क पर थीं। इस बात ने उन्हें कमजोर कर दिया था, लेकिन मायके के लोग उनके साथ खड़े रहे।
विपक्ष पर साधा निशाना
मंत्री ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि उत्तराखंड की बेटी के दुख और सम्मान को समझने के बजाय विपक्ष ने 210 करोड़ रुपये के आरोप को राजनीतिक मुद्दा बना दिया। उन्होंने कहा कि यदि आरोप सही साबित हुए तो वह इस्तीफा दे देंगी, अन्यथा विपक्ष को इस्तीफा देना चाहिए।
उन्होंने भरोसा जताया कि 2027 में भी क्षेत्र की मातृशक्ति उन्हें बेटी मानकर आशीर्वाद देगी और विधानसभा पहुंचाएगी।
वहीं दूसरी ओर कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने मंत्री के खिलाफ मुख्य बाजार में जुलूस निकालकर काले झंडे लहराए।











