नैनीताल। उत्तराखंड हाईकोर्ट को नैनीताल से हल्द्वानी के बेलबाबा क्षेत्र में शिफ्ट करने की योजना को बड़ा झटका लगा है। केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय की क्षेत्रीय अधिकार प्राप्त समिति (REC) ने इसके लिए 30 हेक्टेयर आरक्षित वन भूमि के हस्तांतरण के प्रस्ताव को औपचारिक रूप से खारिज कर दिया है।
क्यों खारिज हुआ प्रस्ताव?
समिति ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि प्रस्ताव में वन संरक्षण अधिनियम के तहत गैर-वन भूमि के वैकल्पिक विकल्पों का पर्याप्त परीक्षण नहीं किया गया था। साथ ही इस परियोजना के लिए 123 पेड़ों का कटान भी होना था।
समिति ने आपत्ति जताई कि जिला प्रशासन ने भले ही गैर-वन भूमि उपलब्ध न होने का प्रमाणपत्र दिया, लेकिन यह स्पष्ट नहीं किया कि अन्य संभावित गैर-वन भूमि विकल्पों की विधिवत तलाश की गई या नहीं।
पहले भी खारिज हो चुका है ऐसा प्रस्ताव
रिपोर्ट में उल्लेख है कि इससे पहले हल्द्वानी के गौलापार क्षेत्र में हाईकोर्ट परिसर के लिए इसी तरह का प्रस्ताव खारिज किया जा चुका है, जिसमें 4,238 पेड़ों के कटान पर आपत्ति आई थी।
जगह की कमी से शिफ्टिंग का प्रस्ताव
समिति की बैठक में हाईकोर्ट के प्रतिनिधि ने बताया था कि नैनीताल स्थित मौजूदा परिसर में मुकदमों की संख्या 2010 में करीब 4 हजार से बढ़कर अब 64 हजार से ज्यादा हो गई है, जिससे जगह की भारी कमी है। वादकारियों को आवास और होटलों पर ज्यादा खर्च करना पड़ता है और शहर में जाम की समस्या भी बनी रहती है।
बता दें कि नैनीताल के जिलाधिकारी की ओर से बेलबाबा क्षेत्र में हाईकोर्ट शिफ्ट करने का प्रस्ताव शासन को भेजा गया था। इस मामले में अधिवक्ता कौशल साह जगाती ने केंद्रीय मंत्रालय में शिकायत की थी और हाईकोर्ट में याचिका भी दायर की थी, जो खारिज हो गई थी। अब REC की यह रिपोर्ट अधिवक्ता कौशल साह जगाती और अधिवक्ता कार्तिकेय हरि गुप्ता को मिली है, हालांकि यह रिपोर्ट अभी सार्वजनिक नहीं हुई है।
समिति ने दिए गैर-वन भूमि तलाशने के निर्देश
विस्तृत विचार-विमर्श के बाद समिति ने वन (संरक्षण एवं संवर्धन) नियम 2023 के तहत बेलबाबा के प्रस्ताव को नामंजूर करते हुए कहा कि परियोजना गैर-विशिष्ट प्रकृति की है, इसलिए उपयुक्त वैकल्पिक गैर-वन भूमि की संभावनाओं को पूरी तरह तलाशा जाना चाहिए और राज्य सरकार को इसके निर्देश दिए हैं।










