चकराता/देहरादून। पहाड़ की संस्कृति जितनी खूबसूरत है, वहां की हकीकत उतनी ही कठिन। देहरादून के आदिवासी बहुल क्षेत्र जौनसार-बावर से ऐसी ही एक तस्वीर सामने आई है, जहां परंपरा निभाने के लिए एक नई नवेली दुल्हन को ढाई घंटे पहाड़ की पगडंडियां नापनी पड़ी। इस ढाई घंटे के दौरान दुल्हन को 8 किलोमीटर पैदल चलकर अपने ससुराल पहुंचना पड़ा।
बात चकराता ब्लॉक के उदावा गांव की है। यहां बुल्हाड़ गांव की शर्मिला और उदावा के अनिल की शादी हुई। जौनसार में शादी की एक अनोखी रस्म है ‘जोजोड़’। इसमें दूल्हा बारात लेकर नहीं आता, बल्कि दुल्हन खुद बारात लेकर दूल्हे के घर जाती है।
शर्मिला भी इसी परंपरा के तहत सजी-धजी बारात लेकर ससुराल के लिए निकली, लेकिन गांव तक सड़क ही नहीं थी। नतीजा, दुल्हन को लहंगे में ही पथरीले रास्तों पर करीब ढाई घंटे पैदल चलकर ससुराल पहुंचना पड़ा। साथ में बाराती भी पैदल ही चले।
गांव वालों का कहना है कि सड़क के लिए कई बार मांग की, पर आज तक सड़क नहीं पहुंची। दुल्हन के पैदल ससुराल जाने की यह तस्वीर जौनसार की समृद्ध परंपरा के साथ-साथ सिस्टम की लापरवाही पर भी सवाल खड़े कर रही है।
सड़क न होने की समस्या चकराता विधायक प्रीतम सिंह के विकास कार्यों पर भी सवालिया निशान लगता है।











