देहरादून। राजधानी में जमीन हथियाने का ऐसा खेल सामने आया है जिसे सुनकर पुलिस भी हैरान है। प्रेमनगर इलाके में एक जिंदा इंसान को सरकारी दस्तावेजों में मृत बता दिया गया और उसकी जमीन हड़पने के लिए वसीयत से लेकर श्मशान घाट की पर्ची तक फर्जी बना दी गई।
इस सनसनीखेज मामले में पुलिस ने शहर के नामी शिक्षण संस्थान दून ग्रुप ऑफ कॉलेजेज के निदेशक समेत तीन लोगों पर मुकदमा दर्ज किया है।
कोर्ट के आदेश पर दर्ज हुआ मुकदमा
यह कार्रवाई श्यामलाल की तहरीर पर हुई है। श्यामलाल सिमलास ग्रांट, डोईवाला के रहने वाले हैं और स्व. ताराचंद के बेटे हैं। उन्होंने कोर्ट में प्रार्थना पत्र देकर आरोप लगाया कि उनके पिता ताराचंद की संपत्ति को हड़पने के लिए बड़ा षड्यंत्र रचा गया। कोर्ट के आदेश के बाद प्रेमनगर थाने में मुकदमा अपराध संख्या 216/2026 दर्ज किया गया।
पुलिस ने इस मामले में ठाकुरपुर, प्रेमनगर निवासी चंद्रावती पत्नी बलवीर उर्फ भोला, दून ग्रुप के निदेशक डॉ. संजय कुमार चौधरी और उनकी मां ओमवती को आरोपी बनाया है। इन सभी पर धोखाधड़ी, जालसाजी, कूटरचित दस्तावेज तैयार करने और आपराधिक साजिश की गंभीर धाराओं में केस लिखा गया है।
30 साल पुरानी वसीयत का खेल
आरोप बेहद चौंकाने वाले हैं। शिकायत के मुताबिक आरोपियों ने 3 अगस्त 1995 की तारीख में ताराचंद के नाम की एक फर्जी वसीयत तैयार कर ली। वसीयत को सही साबित करने के लिए श्मशान घाट की एक नकली रसीद भी बनाई गई, जिसमें दिखाया गया कि ताराचंद की मौत 1995 में ही हो गई थी।
जबकि हकीकत में ताराचंद उस समय जीवित थे। आरोप है कि इन्हीं फर्जी कागजों के सहारे जमीन को अपने नाम कराने की पूरी तैयारी कर ली गई थी। जब पीड़ित परिवार ने विरोध किया तो उन्हें धमकाया भी गया।
प्रेमनगर थाना प्रभारी ने बताया कि मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। वसीयत और श्मशान की रसीद को कब्जे में लेकर उनकी फोरेंसिक जांच कराई जाएगी। जांच के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।










