ऋषिकेश। एम्स ऋषिकेश के किच्छा स्थित निर्माणाधीन सैटेलाइट सेंटर में नौकरी के नाम पर फर्जीवाड़े का बड़ा भंडाफोड़ हुआ है। एम्स प्रशासन और सुरक्षा विभाग ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए तीन युवकों को फर्जी नियुक्ति पत्र और दो लाख रुपये नकद के साथ पकड़कर पुलिस के हवाले किया है। इस कार्रवाई के बाद एम्स प्रशासन खुद भी सवालों के घेरे में आ गया है।
कार में बैठकर चल रहा था पूरा रैकेट
एम्स प्रशासन को सूचना मिली थी कि किच्छा सैटेलाइट सेंटर में नौकरी दिलाने के नाम पर फर्जी पंपलेट बांटे जा रहे हैं। एम्स पीआरओ डॉ. श्रीलॉय मोहंती के मुताबिक सुरक्षा टीम ने जाल बिछाया। एक कर्मचारी को फर्जी अभ्यर्थी बनाकर भेजा गया। आरोपी बैराज रोड पर क्रेटा कार में बैठकर अभ्यर्थियों से लेन-देन कर रहे थे। मौके पर तलाशी लेने पर नर्सिंग ऑफिसर और एमटीएस पद के दो फर्जी नियुक्ति पत्र और दो लाख रुपये बरामद हुए। आरोपी एम्स में काम करने वाली आउटसोर्स एजेंसी के नाम का इस्तेमाल कर रहे थे और पंपलेट पर दिल्ली एम्स का लोगो लगाकर किच्छा एम्स में भर्ती का झांसा दे रहे थे।
लिखित शिकायत में देरी से उठे सवाल
इस मामले में नया पेंच एम्स प्रशासन की ओर से लिखित शिकायत में की गई देरी ने डाल दिया है। कोतवाली ऋषिकेश प्रभारी यशपाल बिष्ट के अनुसार तीनों को पुलिस को सौंप तो दिया गया, लेकिन रात 9 बजे तक कई बार कहने के बाद भी लिखित तहरीर नहीं दी गई। पुलिस को कहना पड़ा कि वह नोटिस अधिकारी के दफ्तर के बाहर चस्पा करेगी। इससे एम्स की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो गए हैं। प्रारंभिक जांच में एम्स से जुड़े दो लोगों की भूमिका सामने आने की भी बात सामने आ रही है।
पूर्व निदेशक डॉ. रविकांत के समय से दागदार रहा है भर्ती का इतिहास
यह कोई पहला मामला नहीं है। एम्स ऋषिकेश का विवादों से पुराना नाता है। पूर्व निदेशक डॉ. रविकांत के कार्यकाल से ही लगातार भर्ती और खरीद घोटाले सामने आते रहे हैं।
2021 में आरक्षित पदों पर 32 डॉक्टरों की नियुक्ति में गड़बड़ी की याचिका हाईकोर्ट में दायर हुई थी। इसके बाद रोड स्वीपिंग मशीन, केमिस्ट शॉप आवंटन, वेसल सीलिंग सिस्टम और कोरोनरी केयर यूनिट के नाम पर करोड़ों के भुगतान घोटाले उजागर हुए। सीबीआई जांच में 2.73 करोड़ से लेकर 8 करोड़ रुपये तक के घोटाले में पूर्व निदेशक समेत कई अधिकारियों पर मुकदमा दर्ज हुआ और चार्जशीट दाखिल हुई।
ऐसे में एक बार फिर सैटेलाइट सेंटर के नाम पर फर्जी भर्ती का मामला सामने आने के बाद एम्स प्रशासन खुद कटघरे में खड़ा नजर आ रहा है।
फिलहाल एम्स प्रशासन ने युवाओं से अपील की है कि भर्ती संबंधी कोई भी जानकारी केवल एम्स की आधिकारिक वेबसाइट से ही लें और किसी एजेंट या व्यक्ति के झांसे में आकर पैसे न दें।








