पौड़ी। प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था की हकीकत एक बार फिर सामने आ गई है, और इस बार सवाल सीधे सरकार के दावों पर उठ रहा है।
कहा जा रहा था कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने स्वास्थ्य विभाग धन सिंह रावत से लेकर सुबोध उनियाल को सौंपा है तो कुछ बड़ा बदलाव होगा। शुरूआत में नए स्वास्थ्य मंत्री काफी सक्रिय दिखे, लेकिन दो महीने के अंदर ही विभाग की हालत फिर जस की तस हो गई। अब तो ये भी पता नहीं चल रहा कि विभाग में काम हो भी रहा है या नहीं।
इस लचर व्यवस्था की पोल भरसार विश्वविद्यालय की एक छात्रा की मौत ने खोल दी है। जानकारी के अनुसार भरसार विवि की छात्रा मधु की तबीयत बिगड़ी। विवि के अस्पताल में डॉक्टर नहीं मिले तो उसे पाबौ अस्पताल भेजा गया। वहां भी सही इलाज नहीं मिला। इसके बाद उसे जिला अस्पताल पौड़ी रेफर किया गया, लेकिन वहां भी स्थिति नहीं सुधरी। वहां से उसे श्रीनगर मेडिकल कॉलेज भेजा गया और अंत में एम्स के लिए रेफर कर दिया गया, लेकिन रास्ते में ही उसकी मौत हो गई।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि यह पूरा मामला स्वास्थ्य मंत्री रहे धन सिंह रावत के विधानसभा क्षेत्र का है। पाबौ से पौड़ी और पौड़ी से श्रीनगर तक अस्पतालों की श्रृंखला होने के बावजूद एक छात्रा को बचाया नहीं जा सका। इस घटना ने धामी सरकार के स्वास्थ्य के दावों की जमीनी हकीकत उजागर कर दी है।








