टिहरी लोकसभा सीट से भाजपा सांसद माला राज्य लक्ष्मी शाह के क्षेत्र में न दिखने का मामला अब सियासी तूल पकड़ चुका है। रविवार को टिहरी और आसपास के क्षेत्रों में “टिहरी की सांसद लापता” और “जनता पूछ रही है, सांसद कहां हैं” लिखे पोस्टर चस्पा किए जाने के बाद कांग्रेस ने सड़कों पर उतरकर विरोध शुरू कर दिया है। सोशल मीडिया पर भी सांसद की तस्वीर के साथ “लापता” लिखकर पोस्ट वायरल हो रहे हैं।
कांग्रेस कार्यकर्ताओं का आरोप है कि प्रदेश में लगातार बारिश और आपदा के कारण सड़कें बंद हैं, बाढ़ से नुकसान हो रहा है और जनसमस्याएं बढ़ रही हैं। ऐसे समय में क्षेत्रीय सांसद का जनता के बीच न होना चिंता का विषय है। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि आपदा के दौर में जनप्रतिनिधि का क्षेत्र में मौजूद रहकर राहत कार्यों की निगरानी करना जरूरी होता है, लेकिन टिहरी की जनता को लंबे समय से सांसद की अनुपस्थिति खल रही है। उन्होंने मांग की कि सांसद तुरंत क्षेत्र का दौरा करें और लोगों की समस्याएं सुनें। चेतावनी दी कि अगर जल्द सुनवाई नहीं हुई तो आंदोलन और तेज किया जाएगा।
भाजपा ने कांग्रेस के आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। पार्टी नेताओं का कहना है कि सांसद माला राज्य लक्ष्मी शाह लगातार दिल्ली और देहरादून में बैठकों में व्यस्त हैं। वह टिहरी के लिए केंद्र से योजनाएं और फंड लाने का काम कर रही हैं। नेताओं ने इसे विपक्ष की “सस्ती राजनीति” करार देते हुए कहा कि सांसद बहुत जल्द क्षेत्र का दौरा करेंगी और विकास कार्यों की समीक्षा करेंगी।
टिहरी गढ़वाल सीट उत्तराखंड की सबसे चर्चित और बड़ी लोकसभा सीटों में से एक है। यह सीट 1952 से अस्तित्व में है और यहां राजपरिवार का गहरा प्रभाव रहा है। माला राज्य लक्ष्मी शाह टिहरी रियासत के राजपरिवार से हैं। उनके पति मानवेंद्र शाह और ससुर कीर्ति सिंह भी यहां से सांसद रह चुके हैं।
माला राज्य लक्ष्मी शाह पहली बार 2012 में हुए उपचुनाव में टिहरी से सांसद बनी थीं। इसके बाद 2014 और 2019 में भी उन्होंने जीत दर्ज की। 2019 में उन्होंने कांग्रेस के प्रीतम सिंह को बड़े अंतर से हराया था। क्षेत्र में उन्हें “राजमाता” के नाम से भी जाना जाता है। उनके कार्यकाल में चारधाम सड़क, रेल और पर्यटन से जुड़ी कई योजनाएं टिहरी में आई हैं।
लेकिन हर चुनाव के बाद विपक्ष सांसद की क्षेत्र में उपस्थिति को लेकर सवाल उठाता रहा है। पहले भी मानसून और आपदा के समय में “लापता सांसद” के पोस्टर लगाए जा चुके हैं। इस बार भी बरसात और आपदा को मुद्दा बनाकर कांग्रेस ने पुराने हथियार को फिर से आजमाया है।
फिलहाल पोस्टरबाजी और सोशल मीडिया कैंपेन के बाद टिहरी में सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। अब देखना होगा कि सांसद कब क्षेत्र में आकर स्थिति का जायजा लेती हैं।







