कॉर्बेट क्षेत्र में 12 साल बाद दूसरी बार हुई दुर्लभ प्रजाति की मौजूदगी दर्ज, जैव विविधता के लिए शुभ संकेत
उत्तराखंड के रामनगर स्थित कॉर्बेट परिक्षेत्र में एक बार फिर दुर्लभ उड़न गिलहरी (फ्लाइंग स्क्विरल) की मौजूदगी दर्ज होने से वन्यजीव प्रेमियों और वन विभाग में उत्साह है। टेड़ा रोड स्थित एक निजी आवास से वन विभाग की टीम ने इस दुर्लभ जीव का सफलतापूर्वक रेस्क्यू कर स्वास्थ्य परीक्षण के बाद सुरक्षित जंगल में छोड़ दिया।
कोसी रेंज में तैनात रेस्क्यू कर्मी आशीष कश्यप ने बताया कि उड़न गिलहरी का यह रेस्क्यू कॉर्बेट क्षेत्र के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। जानकारी के अनुसार, इस प्रजाति को कॉर्बेट में करीब 12 वर्ष बाद दूसरी बार देखा गया है। इससे पहले इसकी मौजूदगी ढिकुली क्षेत्र में दर्ज की गई थी।
वन विशेषज्ञों के अनुसार उड़न गिलहरी पूरी तरह रात्रिचर जीव है। यह पक्षियों की तरह पंखों से नहीं उड़ती, बल्कि अपने अगले और पिछले पैरों के बीच मौजूद विशेष झिल्ली (पैटेजियम) की सहायता से एक पेड़ से दूसरे पेड़ तक लगभग 80 से 100 मीटर तक ग्लाइड करती है। दिन के समय यह पेड़ों के खोखलों में विश्राम करती है और रात में भोजन की तलाश में निकलती है।
वन विभाग का कहना है कि इस दुर्लभ प्रजाति की मौजूदगी कॉर्बेट के जंगलों की समृद्ध जैव विविधता और स्वस्थ वन पारिस्थितिकी तंत्र का प्रमाण है। विभाग ने लोगों से अपील की है कि यदि किसी को ऐसा वन्यजीव दिखाई दे तो उसे नुकसान पहुंचाने के बजाय तुरंत वन विभाग को सूचना दें, ताकि उसका सुरक्षित रेस्क्यू किया जा सके।
क्या खाती है उड़न गिलहरी?
उड़न गिलहरी सर्वाहारी होती है। इसका मुख्य भोजन जंगली फल, बीज, नट्स, कलियां, मशरूम, पेड़ों की छाल, सैप तथा विभिन्न प्रकार के कीड़े-मकोड़े होते हैं। आवश्यकता पड़ने पर यह छोटे पक्षियों के अंडे और छोटे जीव भी खा लेती है। सर्दियों के मौसम में यह भोजन एकत्र कर सुरक्षित स्थानों पर जमा भी करती है। वन पारिस्थितिकी तंत्र के संतुलन को बनाए रखने में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका मानी जाती है।








