देहरादून। एडवोकेट विकेश सिंह नेगी ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को पत्र लिखकर 1996 में खत्म हो चुके उर्दू अनुवादक पदों पर अवैध नियुक्ति का आरोप लगाया है।
उत्तर प्रदेश सरकार ने 1994-95 में उर्दू अनुवादक सह कनिष्ठ लिपिक के 5061 पद बनाए थे। शासनादेश में साफ लिखा था कि ये पद सिर्फ 28 फरवरी 1996 तक अस्थायी हैं। 1996 के बाद ये पद अपने आप समाप्त हो जाएंगे और इनकी जगह कनिष्ठ लिपिक की रिक्ति आते ही पद खत्म माना जाएगा।
एडवोकेट नेगी का कहना है कि 28 फरवरी 1996 के बाद ये पद समाप्त हो चुके हैं। फिर भी उत्तराखंड के पुलिस विभाग, जिलाधिकारी कार्यालय, आबकारी, तहसील, विकासखंड और अन्य विभागों में कई लोग आज भी इन्हीं पदों पर तैनात हैं और वेतन ले रहे हैं। कुछ लोगों ने हाईकोर्ट से स्टे ले रखा था लेकिन उसकी अवधि भी खत्म हो चुकी है।
पत्र में मुख्यमंत्री से मांग की गई है कि
उत्तराखंड में कार्यरत सभी उर्दू अनुवादक कर्मचारियों की नियुक्ति और सेवा अभिलेखों की उच्च स्तरीय जांच कराई जाए।
शासनादेश के अनुसार पद की वैधता और सेवा समाप्ति की समीक्षा हो।
राज्य को हुई वित्तीय हानि की जांच की जाए।
पत्र के साथ यूपी शासन के 1994-95 के शासनादेश, देहरादून पुलिस का RTI जवाब और कार्मिक विभाग का 29 मई 2020 का पत्र संलग्न किया गया है।
अभी सरकार की तरफ से इस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है। अगर जांच होती है तो उत्तराखंड में चल रही ऐसी कई अस्थायी भर्तियों पर असर पड़ सकता है।







