आज के दौर में चोरी किसी वस्तु अथवा ज्वेलरी की ही नहीं खबरों के बाजार में इन दिनों फोटो और अच्छी खबरों के चोर भी काफी सक्रिय हैं। दरअसल वर्तमान दौर में खबरों को लेकर बढ़ती प्रतिस्पर्धा और नई खबरों की जरूरत जिस तेजी से बढ़ रही है उसी तेजी से ख़बरों के चोर भी सक्रिय हो रहे हैं जिन्हें न तो कॉपीराइट एक्ट के तहत होने वाले भारी भरकम जुर्माने की जानकारी है न ही दूसरों की खबर को अपनी खबर बताने की शर्म और हया।
ऐसे चोर आमतौर पर वे खबरनीस और कथित पत्रकार और उनके सहकर्मी होते हैं जो अपनी वेबसाइट पोर्टल के खर्च अथवा अपने आर्थिक और व्यावसायिक हित साधने के लिए न्यूज़ पोर्टल या वेबसाइट तो शुरू कर देते हैं लेकिन उनके पास अपने ही न्यूज पोर्टल या वेबसाइट पर लगाने के लिए रोज अच्छी और नई खबरें नहीं होती। जाहिर है ऐसी स्थिति में वह न्यूज़ चुराने के लिए उन लोकप्रिय व्हाट्सएप ग्रुप को खंगालते हैं जहां अन्य प्रतिष्ठित न्यूज़ प्लेटफार्म की अच्छी खबरें एवं घटनाएं बाकी लोगों को शेयर करते हैं।
इसके बाद उन्हें पसंद आने वाली खबर को फोटो समेत कॉपी करके वे इस दावे के साथ अपनी वेबसाइट पर चिपका देते हैं मानो वह उनके द्वारा तैयार की गई खबर हो। ऐसी स्थिति में जहां से वह मूल खबर चुराई जाती है उन पोर्टल अथवा न्यूज़ प्लेटफार्म की संबंधित खबर के कारण गूगल आईडेंटिटी डिस्टर्ब होती है। क्योंकि जब उस खबर को इंटरनेट पर सर्च किया जाता है तो गूगल का प्लेटफार्म वास्तविक खबर और चुराई गई खबर सर्वर पर रीड करके दोनों को प्रस्तुत करता है जिससे गूगल पर ओरिजिनल खबर और कॉपी की गई खबर को लेकर भ्रम की स्थिति बनती है।
इसके बाद गूगल का सॉफ्टवेयर न्यूज़ की अपलोड टाइमिंग और उसके यूआरएल से स्थिति से खबर की वास्तविकता जांच लेता है और संबंधित चोरी करने वाले पोर्टल को सस्पेक्ट या कंटेंट चोरी की रैंकिंग वाली सूची में डाल देता है।
यदि कोई वेबसाइट बार-बार ऐसा करती है तो गूगल उस कौटिल्य वेबसाइट की रैंकिंग जीरो करके अपने सर्च रिजल्ट से हमेशा के लिए हटा देता है, आमतौर पर तकनीकी स्तर की यह वास्तविकता न्यूज़ की चोरी करने वाली वेबसाइट चलाने वाले लोग नहीं जानते।
हालांकि इस तरह की कंटेंट चोरी से बचने के लिए अधिकांश बड़े न्यूज़ प्लेटफार्म और पोर्टल ने अपने न्यूज़ प्लेटफार्म पर कॉपी पोस्ट को ब्लॉक कर रखा है लेकिन फिर भी कंटेंट चोर कैसे भी करके उनके जरूरत की न्यूज़ कॉपी पेस्ट कर लेते हैं। इतना ही नहीं चोरी करने में भी सावधानी नहीं बरतने के कारण वे कॉपी पेस्ट करते समय हूबहू वह फोटो भी लगा देते हैं जो मूल खबर में लगा होता है। इससे उनकी चोरी पहली नजर में ही पकड़ी जाती है।
लेकिन ऐसे मामलों में प्रतिष्ठित और बड़े न्यूज़ प्लेटफार्म लीगल नोटिस की प्रक्रिया और विवाद में पड़ने से आमतौर पर बचते है। हालांकि खबरों के चोर यह वास्तविकता जानते हैं इसलिए ऐसे मामलों में कॉपीराइट एक्ट की कार्यवाही और भारी भरकम जुर्माना से बचने के लिए अपने पोर्टल अथवा वेबसाइट पर न्यायिक क्षेत्र भोपाल अथवा इंदौर कर रखा है और वह ऑपरेट कहीं और से हो रहे हैं। हाल ही में कॉपीराइट एक्ट की कर्रवाई में ऐसे कुछ मामले सामने आए हैं।
हालांकि फिर भी खबरों के बाजार में अब मूल एवं वास्तविक खबर को सहेजना भी किसी चुनौती से कम नहीं है।








