श्रीनगर गढ़वाल। ऐतिहासिक क्षेत्र देवलगढ़ में स्थित प्राचीन गुफाओं से महत्वपूर्ण पुरातात्विक अवशेष मिलने का मामला सामने आया है। गुफा की सफाई के दौरान हड्डियों के अवशेष और कंगन प्राप्त हुए, जिसके बाद क्षेत्र में हलचल मच गई। सूचना मिलने पर पुरातत्व विभाग की टीम मौके पर पहुंची और सभी अवशेषों को अपने कब्जे में लेकर जांच प्रक्रिया शुरू कर दी है।
देवलगढ़, जो कभी गढ़वाल राजाओं की राजधानी रहा है, अपने समृद्ध इतिहास और धार्मिक महत्व के लिए जाना जाता है। यहां लंबे समय से प्राचीन गुफाओं के संरक्षण का कार्य चल रहा है। इसी क्रम में एक गुफा की सफाई के दौरान यह अहम खोज सामने आई।
देवलगढ़ विकास एवं संघर्ष समिति के अध्यक्ष एवं श्री राजराजेश्वरी मंदिर के मुख्य पुजारी कुंजिका प्रसाद उनियाल ने बताया कि क्षेत्र में भैरव गुफा, सिद्ध भैरव गुफा सहित कई प्राचीन गुफाएं और नाथ सिद्धों की समाधियां मौजूद हैं, जो ऐतिहासिक और आध्यात्मिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने बताया कि सफाई कार्य के दौरान मजदूरों को एक गुफा में तीन कंगन, एक छोटा और दो बड़े और हड्डियों के अवशेष मिले, जिसकी तत्काल सूचना पुरातत्व विभाग को दी गई।
बुधवार को पुरातत्व विभाग के प्रभारी अनिल बिष्ट, मानचित्रकार प्रेम चंद्र ध्यानी, जेई अनिल नेगी, विनीत गिरि पुरातत्व फोटोग्राफर टीम सहित मौके पर पहुंचे और अवशेषों को सुरक्षित कब्जे में लिया। विभाग के अनुसार, इन अवशेषों को कार्बन डेटिंग और धातु परीक्षण के लिए भेजा जाएगा, जिससे इनके समयकाल और ऐतिहासिक महत्व का सटीक आकलन किया जा सकेगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह खोज देवलगढ़ क्षेत्र के प्राचीन इतिहास और यहां की सांस्कृतिक विरासत को समझने में अहम कड़ी साबित हो सकती है। स्थानीय लोगों ने भी इस खोज को लेकर उत्साह व्यक्त किया है और क्षेत्र में व्यापक स्तर पर पुरातात्विक संरक्षण कार्य की मांग उठाई है।
देवलगढ़ की यह खोज एक बार फिर इस क्षेत्र की ऐतिहासिक महत्ता को उजागर करती है और भविष्य में यहां और भी महत्वपूर्ण खोजों की संभावनाओं को मजबूत बनाती है।










