महिंद्रा ग्रुप के चेयरमैन आनंद ने उत्तराखंड के पारंपरिक वसंत उत्सव ‘फूलदेई’ की दिल खोलकर तारीफ की है। उन्होंने इस अनोखे त्योहार की तुलना अमेरिका के मशहूर हैलोवीन से करते हुए कहा कि भारत का यह पर्व “मांगने” का नहीं, बल्कि “देने” और प्रकृति से जुड़ने का संदेश देता है।
भारत त्योहारों का देश है, लेकिन कुछ त्योहार इतने मासूम और सुंदर होते हैं कि उनके बारे में जानकर ही चेहरे पर मुस्कान आ जाती है। उत्तराखंड के पहाड़ों में मनाया जाने वाला फूलदेई भी ऐसा ही एक उत्सव है। जब आनंद महिंद्रा ने X (पूर्व में ट्विटर) पर इस त्योहार का जिक्र किया, तो लोगों को अपनी सांस्कृतिक विरासत पर गर्व महसूस हुआ।
महिंद्रा ने एक वीडियो शेयर करते हुए लिखा कि हाल ही तक उन्हें इस त्योहार के बारे में पता ही नहीं था। उन्होंने बताया कि इस दिन बच्चे पहाड़ियों से ताजे फूल इकट्ठा करते हैं और घर-घर जाकर लोगों की दहलीज पर फूल सजाते हैं। वे घर-परिवार की खुशहाली के लिए गीत गाते हैं—
“फूलदेई, छम्मा देई,
देणी द्वार, भर भकार…”
जिसका अर्थ है कि घर में सुख-समृद्धि और खुशहाली आए। बदले में घर के लोग बच्चों को मिठाइयां और आशीर्वाद देते हैं।
आनंद महिंद्रा ने इस परंपरा की तुलना अमेरिका के हैलोवीन से की, जहां बच्चे “ट्रिक-ऑर-ट्रीट” कहते हुए घर-घर जाते हैं। लेकिन उन्होंने एक खूबसूरत अंतर बताया, हैलोवीन में बच्चे पहले कुछ मांगते हैं, जबकि फूलदेई में बच्चे पहले देते है फूल और आशीर्वाद।
इस त्योहार के पर्यावरण से जुड़े संदेश से प्रभावित होकर महिंद्रा ने कहा कि इस खूबसूरत वसंत उत्सव को दुनिया भर में जाना जाना चाहिए। जैसे होली भारत से निकलकर पूरी दुनिया में मशहूर हो गई, वैसे ही फूलदेई भी वैश्विक पहचान पा सकता है।











