हरिद्वार। फर्जी शंकराचार्य स्वामी राजराजेश्वराश्रम महाराज ने भाजपा को लताडते हुए कहा कि संघ को 100 वर्षो में जितना बढ़ना चाहिए था, वह भाजपा की वजह से नही बढ़ सका। संघ के विचार को सबसे ज्यादा पलीता भाजपा ही लगा रही है।
उन्होंने कहा कि राजनीति तोड़ती है जोड़ती नही। सभी राज नेताओ का चाल चरित्र एक है। संघ का स्वयंसेवक भाजपा का गुलाम नही है। लोग टिकट के चक्कर में संघ में ना जाए। संघ में जिसने जाना है, वह यह सोच कर आये की मुझे अपना जीवन माँ भारती के चरणों में समर्पित करना है। उन्होंने संघ के लोगों को भी भाजपा से अपने रिश्तों को लेकर विचार करना चाहिए। संघ एक साधना, तपस्या का कार्य है, ना कि राजनीति का। संघ का उद्देश सत्ता नही है,भ्रम में मत फंसो, संघ भाजपा का कोई स्वयंसेवक सेवी संगठन नही है।
यह था कार्यक्रम
उन्होंने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ शताब्दी वर्ष कार्यक्रमों की श्रंखला में अनुराग पैलेस में आयोजित दक्षिण हरिद्वार के ज्वालापुर की आर्यनगर बस्ती के हिंदू सम्मेलन की अध्यक्षता करते हुए स्वामी राजराजेश्वराश्रम महाराज ने कहा कि हिन्दू सोया हुआ है। निरन्तर हिंदुओ की संख्या घट रही है। इसके लिए कोई और दोषी नही बल्कि हमारी पीढ़ी-लिखी पढ़ी है। जहां दूसरे धर्मो में बच्चों को कुदरत की देन कहा जाता है, वहीं सनातन धर्म को मानने वाले अधिक बच्चों की परवरिश की चिंता में निसंतान होते जा रहे है।
उन्होंने कहा कि दूसरे धर्मों के बुजुर्ग अपने बच्चों को डरा कर रखते है, लेकिन हिंदुओ में बच्चे बुजुर्गों पर हावी हैं। परिवारों में एक-दो बच्चे होने का नाजायज लाभ आज के बच्चे ले रहे है। साथ ही कहा कि यदि हिन्दू धर्म परम्पराओं को जीवित रखना है तो अपने परिवार को बढ़ाने पर ध्यान दें। सनातन धर्म के लिए सबसे कलंकित बात है जहां वृद्ध आश्रम खोले जा रहे है।
कभी भाजपा के थे खासमखास
बता दें कि ये वही फर्जी शंकराचार्य हैं, जिन्होंने भाजपा का शासन रहते कई लाभ लिए। लाभ लेने के बाद भाजपा को ही कोसने लगे, जबकि उत्तराखंड के मुख्यमंत्री जब भी हरिद्वार आते हैं तो ना जाने क्यों इनके आगे माथा टेकते हैं। वहीं भाजपा धर्म के उत्थान की बात करती है। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद से यूपी के मुख्यमंत्री उनके शंकराचार्य होने का प्रमाण मांगते हैं। वैसे स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के शंकराचार्य होने का मामला कोर्ट में विचाराधीन है। जबकि स्वामी राजराजेश्वराश्रम स्वयं को शंकराचार्य लिखते हैं। इतना ही नहीं इनके अखाड़े निरंजनी में ये मंडलेश्वर हैं। बाबजूद इसके ये शंकराचार्य किस हैसियत से लिखते हैं?
धर्म की दुहाई देने वाली अखाड़ा परिषद भी ऐसे फर्जी शंकराचार्य के खिलाफ कोई कारवाही करने को तैयार नहीं है। वैंसे कारवाही करें भी तो कैसे, जब वे स्वयं स्वामी राजराजेश्वराश्रम की चरण वंदना करने में पीछे नहीं हैं।
बड़ा सवाल ये कि भाजपा सरकार ने स्वामी राजराजेश्वराश्रम को सुरक्षा किसलिए उपलब्ध कराई है
आश्रम के बाहर कई पुलिसकर्मी हर समय तैनात रहते हैं। आखिर सुरक्षा देने का क्या कारण है? जिस आश्रम में सुरक्षा दी गई है, वह विवादित है और कोर्ट में मामला विचाराधीन है। ऐसे में आए दिन सरकार के मुख्यमंत्री और नेताओं का वहां जाना क्या न्याय व्यवस्था को प्रभावित करने वाला नहीं कहा जायेगा। आखिर सुरक्षा के नाम पर सरकारी धन की बर्बादी सरकार क्यों और किस कारण से कर रही है?










