इस वर्ष उत्तराखंड की तीन हस्तियों को पद्म पुरस्कार मिला है, लेकिन नेगी को इस वर्ष भी दरकिनार किया गया है।पिछले पांच दशक से उत्तराखंड संगीत जगत के सिरमौर रहे गढ़रत्न नरेंद्र सिंह नेगी को इस वर्ष भी पद्म पुरस्कार नहीं मिलने से उनके प्रशंसकों में मायूसी और सरकार के प्रति नाराजगी है। लंबे समय से अपने गीतों के माध्यम से पहाड़ की पीड़ा उठाने वाले नेगी दा हर साल की तरह इस साल भी पद्म पुरस्कार से चूक गए हैं।
सरकार विरोधी गीत बने राह का रोड़ा
वर्ष 2005 में तत्कालीन कांग्रेस की नारायण दत्त तिवारी सरकार के खिलाफ नेगी दा द्वारा गाए गए गीत ‘नौछमी नारैणा’ ने प्रदेश सरकार को हिला कर रख दिया था। गीत रिलीज होने के बाद सरकार द्वारा पहली बार उत्तराखंड फिल्मइंडस्ट्री में सेंसर बोर्ड लगा दिया और इस गीत को कैसेट से हटा दिया था। हालांकि तब तक इस कैसेट की लाखों की संख्या मे बिक्री हो चुकी थी। परिणाम स्वरूप 2007 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को करारी हार का सामना करना पड़ा था। यह भी एक कारण है कि सरकार नेगी दा को पद्म पुरस्कार से दूर ही रखती है।
जब नेगी दा ने निशंक सरकार के घोटाले किए उजागर
वर्ष 2009 में रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ ने भाजपा सरकार में उत्तराखंड के पांचवें मुख्यमंत्री के तौर पर शपथ ली। अपने कार्यालय के दौरान उन पर कुंभ घोटाला, स्टेडिया कैमिकल फेक्ट्री घोटाला सहित कई अन्य आरोप लगे तो नरेंद्र सिंह नेगी ने वर्ष 2010 मे ‘अब कथगा खै ल्यो’ नाम से कैसेट रिलीज की। इस कैसेट का एक गीत ‘कमीशन कू मीट भात, रिश्वत को रैलो’ ने एक बार फिर से प्रदेश में धूम मचा दी। यह गीत तत्कालीन मुख्यमंत्री निशंक पर लगे घोटाले के आरोपों का खुलासा करने वाला था। जिसके बाद निशंक को भी अपनी मुख्यमंत्री की कुर्सी से हाथ धोना पड़ा था।
दोनों ही पार्टियां नहीं चाहती कि नेगी दा को मिले पद्म पुरस्कार
नेगी दा के इन गीतों से भाजपा-कांग्रेस दोनों ही पार्टियों के मुख्यमंत्रियों को अपने पद से हटना पड़ा था। ऐसे में दोनों ही पार्टियां नहीं चाहती हैं कि नरेंद्र सिंह नेगी को पद्म पुरस्कार मिले, जबकि संगीत जगत के क्षेत्र में प्रीतम भरतवाण, बसंती बिष्ट को यह पुरस्कार मिल चुका है। नेगी दा पिछले पांच दशकों से पहाड़ की पीड़ा अपने गीतों के माध्यम से जनता तक पहुंचा रहे हैं। उनके नाम एक हजार से अधिक गीत हैं। तब चाहे उत्तराखंड आंदोलन हो या कारगिल युद्ध, उन्होंने हमेशा से जनगीत गाएं हैं। लेकिन डरी सहमी हुई सरकार में उन्हें पदम पुरस्कार देने का साहस नहीं है। ऐसे में नेगी दा के प्रशंसकों में मायूसी होना जायज है।
मुख्यमंत्री धामी ने दिया था पद्म पुरस्कार के लिए आश्वासन
12 अगस्त 2021 को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी नरेंद्र सिंह नेगी के जन्मदिवस के अवसर पर उनके आवास पर पहुंचे थे, तब वहां उन्होंने केंद्र सरकार से नेगी जी को पद्म पुरस्कार देने की सिफारिश करने का आश्वासन दिया था। ऐसे में यह रोचक है कि या तो धामी सरकार ने केंद्र से सिफारिश नहीं की या फिर केंद्र सरकार ने धामी सरकार की सुनी नहीं!
हालांकि नरेंद्र सिंह नेगी कहते हैं कि उनके प्रशंसकों ने उन्हें जो प्यार, समर्थन और सम्मान दिया है, वह पदम पुरस्कार से कई गुना बढ़ा है।









