उत्तराखंड राज्यभर की आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, सहायिका और मिनी आंगनबाड़ी कर्मचारियों ने अपने ही सरकारी विभागीय गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि उनसे जबरन सेनेटरी नैपकिन बेचने का दबाव बनाया जा रहा है।
नैपकिन की कीमत पहले 6 रूपए प्रति पैकेट थी, जिसे बढ़ाकर अब रूपए 15 प्रति पैकेट कर दिया गया है।
कीमत अधिक होने से लोग इसे खरीदने से कतराते हैं और इसकी भरपाई आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं से वसूली करके की जा रही है।
यह कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ता समाज के निचले स्तर तक सेवाएँ पहुँचाने, बच्चों, गर्भवती और महिलाओं की देखभाल हेतु कार्यरत हैं, न कि किसी उत्पाद की बिक्री हेतु है।
इस प्रकार की जबरन वसूली और अनुचित दबाव उनकी आर्थिक, सामाजिक और मानवाधिकारों का उल्लंघन है।
उपरोक्त मामले में छात्रा सृष्टि ने मानवाधिकार आयोग उत्तराखंड सरकार में शिकायत दर्ज कराई गई और कहा गया कि यह मामला अत्यंत गंभीर है, और प्रदेश की हजारों आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की गरिमा एवं अधिकारों से जुड़ा हुआ है। इस पूरे प्रकरण पर तत्काल निष्पक्ष जांच कराई जाए।
आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं से जबरन वसूली और अनुचित दबाव की नीति को तुरंत समाप्त किया जाए।
उनकी गरिमा और मानवाधिकारों की रक्षा सुनिश्चित की जाए।
उन्होंने कहा है कि जनहित एवं महिला कार्यकर्ताओं के हित में शीघ्रातिशीघ्र आवश्यक कार्यवाही करने की कृपा करें।
मानवाधिकार आयोग के सदस्य (आईपीएस) राम सिंह मीना द्वारा शिकायत पर सुनवाई कर आदेश जारी किए गए।
शिकायतकर्ता सृष्टि ने उत्तराखंड राज्य में आंगनबांडी कार्यकर्ताओं से जबरन वसूली एंव गैर-न्यायोचित दबाव बनाने तथा प्रकरण में आवश्यक कार्यवाही कराये जाने के सम्बन्ध में शिकायती पत्र प्रेषित किया है।
न्यायहित में शिकायती पत्र की प्रति सचिव महिला सशक्तिकरण एंव बाल विकास परियोजना उत्तराखण्ड को भेज दी जाये कि वह इस सम्बन्ध में विधिनुसार आवश्यक कार्यवाही करेंगे।
यह मामला प्रदेश की आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की गरिमा और अधिकारों से जुड़ा होने के कारण जनहित में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अब सभी की नजरें विभागीय जांच और आगे की कार्रवाई पर टिकी हैं।








