लंबे समय से विवादों में रहे पूर्व विधायक कुंवर प्रणव सिंह चैंपियन फिर विवादों में घिर गए हैं। माननीय न्यायालय ने उन्हें सशर्त जमानत दी थी। लेकिन वह फिर भी भीड़ बड़े माहौल में जा रहे हैं।
26 जनवरी को गणतंत्र दिवस के दिन खानपुर विधायक उमेश कुमार के कैंप कार्यालय पर ताबड़तोड़ फायरिंग के आरोप में गिरफ्तार किए गए भाजपा के पूर्व विधायक कुंवर प्रणव सिंह चैंपियन ने रिहा होते हुए कानून को ताक पर रख दिया। हरिद्वार पुलिस की नाक के नीचे चैंपियन का काफिला हूटर बजाते हुए निकला। इसका वीडियो भी सोशल और डिजिटल मीडिया प्लेटफॉर्म पर जमकर वायरल हो रहा है।
वहीं, जमानत के बाद चैंपियन ने बयान में कहा था कि उन्हें देश के संविधान और न्यायपालिका पर पूरा भरोसा। दूसरी तरफ उन्हीं नियमों और कानून व्यवस्था की वह खुलेआम धज्जियां उड़ाते नजर आए।
कुंवर प्रणव सिंह को 18 अप्रैल को सत्र न्यायालय हरिद्वार से जमानत मिल गई थी। हालांकि, वह जिला अस्पताल हरिद्वार में भर्ती थे। 27 जनवरी को जेल भेजे जाने के बाद करीब 20 दिन वह यहां पर रहे और इसके बाद से वह स्वास्थ्य खराब होने के चलते करीब 32 दिन जिला अस्पताल में भर्ती थे। बुधवार को जब वह अस्पताल के डिस्चार्ज हुए तो समर्थकों की भीड़ के बीच वह काफिले के साथ हूटर बजाते हुए घर के लिए निकले।
इस दौरान हरिद्वार पुलिस मूकदर्शक बनी रही। यही नहीं जेल अधीक्षक ने भी सीधे अस्पताल पहुंचकर खुद कागजी कार्रवाई पूरी करवाकर उन्हें रिहा किया। जिससे पता चलता है कि चैंपियन की रिहाई की प्रक्रिया आम कैदियों से अलग रही। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या यह विशेष दर्जे का सूचक है या फिर कानून सिर्फ आमजन के लिए ही सख्त है। हरिद्वार पुलिस की भूमिका पर भी इससे सवाल खड़े होते हैं। इससे पहले स्वयं कोर्ट फायरिंग के मामले में हरिद्वार पुलिस की भूमिका पर सवाल उठा चुकी है।