हरिद्वार नगर निगम की चर्चित 35 बीघा भूमि की खरीद को लेकर बड़ा घोटाला सामने आया था, आरोप है कि सराय गांव में करीब 50 करोड़ रुपये से अधिक की जमीन कई गुना अधिक कीमत पर खरीदी गई, जिससे भू-स्वामी को अनुचित लाभ पहुंचाया गया।
इन अधिकारियों पर हुई थी कार्रवाई
इस मामले के सामने आने के बाद सरकार की काफी किरकिरी हुई थी, जिसके चलते मुख्यमंत्री को स्वयं हस्तक्षेप करते हुए सख्त कदम उठाने पड़े थे। प्रकरण उजागर होने के बाद तत्कालीन हरिद्वार जिलाधिकारी कर्मेंद्र सिंह और नगर नगर आयुक्त वरुण चौधरी को निलंबित कर दिया गया था। दोनों अधिकारी भारतीय प्रशासनिक सेवा से जुड़े हैं। इनके अलावा एक पीसीएस अधिकारी समेत कुल 12 अधिकारी-कर्मचारियों को निलंबन का सामना करना पड़ा था।
अधिकारियों की भूमिका की जांच के लिए सचिव स्तर के अधिकारी को जांच अधिकारी नामित किया गया था। IAS सचिन कुर्वे ने पूरे प्रकरण की जांच कर अपनी रिपोर्ट शासन को सौंप दी है।
अब इसी जांच रिपोर्ट के आधार पर रिव्यू कमेटी निलंबन पर आगे की कार्रवाई पर विचार करेगी। जिसकी पुष्टि अपर सचिव कार्मिक नवनीत पांडे ने की है।
नियमानुसार राज्य सरकार किसी IAS अधिकारी को एक महीने तक निलंबित रख सकती है। इसके बाद निलंबन बढ़ाने के लिए भारत सरकार की सहमति जरूरी होती है। केंद्र की मंजूरी मिलने पर इन दो आईएएस अधिकारीयों का भविष्य अधर में है।
IAS कर्मेंद्र सिंह और वरुण चौधरी को निलंबित हुए छह महीने पूरे हो चुके हैं। ऐसे में रिव्यू कमेटी उनके निलंबन की अवधि, जांच की प्रगति, बहाली के बाद जांच प्रभावित होने की आशंका और मामले की गंभीरता जैसे बिंदुओं पर मंथन करेगी। करोड़ों रुपये से जुड़े इस मामले को लेकर अब सभी की निगाहें रिव्यू कमेटी के फैसले और मुख्यमंत्री के अंतिम निर्णय पर टिकी हुई हैं।







