देहरादून। किसी ने खूब कहा है कि ‘पहाड़ सुंदर है लेकिन दूर से देखने में’
आमजन की बात की जाए तो पहाड़ पर पहाड़ सी जिंदगी है।
लंबे समय से उत्तराखंड के पहाड़ी क्षेत्रों में गुलदार के साथ-साथ भालू का भी आतंक देखने को मिल रहा है।
गढ़वाल हो या कुमाऊं, दोनों ही जगह पर गुलदार सहित भालुओं के आतंक को देखने की घटनाएं आम दिन अखबारों की सुर्खियां बन रही हैं।
ऐसे में वन विभाग तो लाचार तो है ही साथ ही स्थानीय ग्रामीणों में दहशत का माहौल है, कई जनपदों में स्कूल की छुट्टियां की गई हैं, तो कई जगह विद्यालयों का टाइम टेबल तक बदल दिया गया है।
हालांकि वन विभाग मुस्तैद है, लेकिन पर्याप्त संसाधनों और ग्रामीणों की नाराजगी के चलते विभाग भी पूरी तरह से कार्य नहीं कर पा रहा है।
अब इन्हीं परिस्थितियों को देखते हुए सोशल मीडिया पर उत्तराखंड गढ़ रत्न नरेंद्र सिंह नेगी का पुराना गीत वायरल हो रहा है।
जिसमें वह तत्कालीन ओलंपिक निशानेबाज जसपाल राणा (पौड़ी गढ़वाल) से गुलदार, जिसको उत्तराखंड में बाग कहा जाता है, मारने की मांग कर रहे हैं।
वन विभाग लाचार

उत्तराखंड वन विभाग के पास अपने एक्सपर्ट शूटर नहीं हैं। किराए पर शूटर मंगाते हुए वन विभाग इन कथित आदमखोर गुलदारों को मारने का दावा कर अपनी पीठ खुद थपथपा रहा है, हालांकि इस बात के पुख्ता प्रमाण नहीं है कि यह गुलदार आदमखोर थे या नहीं!
ऐसे में वन्य जीव अधिनियम 1972 का उल्लंघन करने पर स्वयं वन विभाग दोषी है।
अब देखना दिलचस्प होगा की वन मंत्री सुबोध उनियाल मामले को लेकर कितना गंभीर हैं!








