श्री देव सुमन उत्तराखंड विश्वविद्यालय के पं. एल. एम. एस. परिसर, ऋषिकेश में गणित विभाग द्वारा “Intellectual Property Rights in Mathematics: Issues, Opportunities, and Awareness” विषय पर एक महत्वपूर्ण एवं अत्यंत ज्ञानवर्धक विशेष सत्र का आयोजन बड़े उत्साह के साथ सम्पन्न हुआ। यह विषय आज के तीव्र गति से विकसित होते वैश्विक शैक्षणिक एवं शोध परिवेश में अत्यधिक प्रासंगिक है, क्योंकि नवाचार, मौलिकता, अनुसंधान की ईमानदारी तथा बौद्धिक संरक्षण जैसे पहलू पहले से कहीं अधिक महत्त्वपूर्ण हो गए हैं।
कार्यक्रम के उद्घाटन अवसर पर पं. एल. एम. एस. परिसर, ऋषिकेश के निदेशक प्रो. एम. एस. रावत ने अपने प्रेरणादायक उद्बोधन में कहा कि—“हमारे छात्र और शोधार्थी न केवल राज्य स्तर पर, बल्कि राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर विश्वविद्यालय का नाम गौरवान्वित कर रहे हैं। गणित विभाग निरंतर उत्कृष्ट शैक्षणिक वातावरण का निर्माण कर रहा है और यह विशेष सत्र उसकी निरंतर प्रगति, परिश्रम तथा गुणवत्तापूर्ण शैक्षणिक दृष्टिकोण का स्पष्ट प्रमाण है। गणित आज केवल विज्ञान का आधार नहीं, बल्कि इंजीनियरिंग, तकनीक, प्रबंधन, सामाजिक विज्ञान और कृत्रिम बुद्धिमत्ता सहित जीवन के हर क्षेत्र की रीढ़ है। ऐसे कार्यक्रम विद्यार्थियों को भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। मैं विभाग और सभी विद्यार्थियों को शुभकामनाएँ देता हूँ कि वे इसी निष्ठा और उत्साह से प्रगति करते रहें।” उनके संबोधन ने विद्यार्थियों को प्रेरित करने के साथ-साथ विभागीय गतिविधियों को भी नई ऊर्जा प्रदान की।

इस आयोजन में मुख्य वक्ता के रूप में श्री यासिर अब्बास, NIPAM अधिकारी (National Intellectual Property Awareness Mission) ने शिरकत की। NIPAM भारत सरकार की एक महत्वाकांक्षी और व्यापक पहल है, जिसका उद्देश्य पूरे राष्ट्र में छात्रों, शिक्षकों, शोधकर्ताओं, स्टार्टअप्स और नवाचारकर्ताओं को बौद्धिक संपदा अधिकारों के प्रति जागरूक और सशक्त बनाना है। श्री अब्बास ने अपने विस्तृत एवं सारगर्भित व्याख्यान में पेटेंट, कॉपीराइट, ट्रेडमार्क, डिज़ाइन राइट, और शोध की नैतिकता जैसे महत्त्वपूर्ण विषयों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि गणितीय अनुसंधान—जहाँ विचार मॉडल, प्रमेय, एल्गोरिद्म, संगणनात्मक तकनीक और AI आधारित प्रणालियों का रूप लेते हैं—उनके लिए IPR की समझ अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने छात्रों को विशेष रूप से निम्न पहलुओं पर मार्गदर्शन प्रदान किया:
• गणितीय अनुसंधान एवं परिणामों पर IPR का दायरा
• शोध विधियों, एल्गोरिद्म और नए गणितीय डिज़ाइनों को सुरक्षित करने की प्रक्रियाएँ
• शोधकर्ता के रूप में बौद्धिक जिम्मेदारियाँ और नैतिक आचरण
• तकनीकी क्षेत्रों में गणितीय नवाचारों के संरक्षण के अवसर
• पेटेंट फाइलिंग, कॉपीराइट पंजीकरण और ट्रेडमार्क के वास्तविक उपयोग
उनका संबोधन विद्यार्थियों के लिए अत्यंत प्रेरक, सूचनाप्रद और व्यावहारिक उपयोगिता से परिपूर्ण रहा, जिससे कार्यक्रम में रचनात्मकता और नवाचार का एक विशेष वातावरण निर्मित हुआ। कार्यक्रम के दौरान विभाग के शोधार्थियों रश्मि राय, शिवानी नेगी, मनीष प्रकाश और गीता ने मुख्य वक्ता से महत्वपूर्ण प्रश्न पूछते हुए सक्रिय रूप से सहभागिता की। इन शोधार्थियों ने गणितीय अनुसंधान में बौद्धिक संपदा अधिकारों की भूमिका, पेटेंट की संभावनाओं, तथा एल्गोरिद्म एवं मॉडल से जुड़े IPR पहलुओं पर सारगर्भित चर्चा की। उनकी जिज्ञासा, विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण और शोध-उन्मुख प्रश्नों ने सत्र को और अधिक समृद्ध एवं संवादात्मक बना दिया।
प्रो. एस. पी. सती, डीन, संकाय विज्ञान ने कहा— “गणित किसी भी नवाचार की आधारशिला है। विभाग द्वारा आयोजित इस प्रकार की गतिविधियाँ न केवल विद्यार्थियों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित करती हैं, बल्कि उन्हें शोध के प्रति उत्साहित और सक्षम बनाती हैं। विभाग के विद्यार्थियों ने रचनात्मक सोच, विश्लेषणात्मक क्षमता और गणितीय समझ का उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है।”
पूर्व डीन, संकाय विज्ञान, प्रो. जी. एस. ढींगरा ने कहा—“गणितीय सोच जीवन के हर क्षेत्र में आवश्यक विश्लेषणात्मक क्षमता और समस्या-समाधान कौशल को बढ़ाती है। आज के तकनीकी युग में यह कौशल विद्यार्थियों को प्रतिस्पर्धात्मक दुनिया में आगे बढ़ने में सहायक है।”
विभागाध्यक्ष प्रो. अनीता तोमर ने सभी अतिथियों, संकाय सदस्यों एवं विद्यार्थियों का हार्दिक स्वागत करते हुए कहा कि— “गणितीय अनुसंधान में विचार सिद्धांतों, मॉडलों, एल्गोरिद्म, संगणनात्मक विधियों और विश्लेषणात्मक ढाँचों के रूप में विकसित होते हैं। शोधकर्ताओं और विद्यार्थियों द्वारा किए गए मौलिक योगदान बौद्धिक संरक्षण के योग्य हैं। IPR की समझ शोध की सुरक्षा के साथ-साथ एक सुदृढ़ और नैतिक अकादमिक संस्कृति का निर्माण करती है।”उन्होंने आगे कहा “गणित तर्क, नवाचार और रचनात्मकता की भाषा है। हमारे विद्यार्थी निरंतर उत्कृष्ट कार्य कर रहे हैं, और आज हम उनकी मेहनत, प्रतिभा और उपलब्धियों का सम्मान करने के लिए एकत्र हुए हैं।” वर्ष 2025 को उन्होंने विभाग के लिए अत्यंत सक्रिय, समृद्ध और शोधोन्मुखी बताया।
कार्यक्रम में अनेक वरिष्ठ संकाय सदस्य, अधिकारी और शोधार्थी उपस्थित रहे, जिनमें प्रमुख हैं—
• प्रो. कंचन लता सिन्हा, पूर्व डीन, वाणिज्य एवं प्रबंधन
• प्रो. वी. पी. श्रीवास्तव, डीन, वाणिज्य एवं प्रबंधन
• प्रो. संगीता मिश्रा, विभागाध्यक्ष, इतिहास
• डॉ. श्रीकिशन नौटियाल, विभागाध्यक्ष, भूविज्ञान
• डॉ. शालिनी रावत
• डॉ. सीमा नईवाल
• डॉ. एस. के. कुरियाल
• विभिन्न विभागों के शोधविद्वान
सभी की उपस्थिति ने कार्यक्रम की गरिमा और भी बढ़ा दी।
कार्यक्रम का सफल संचालन और संयोजन डॉ. पवन जोशी, मोनिका सती, और प्रो. दीपा शर्मा द्वारा किया गया। समापन पर डॉ. गौरव वर्श्नेय ने सभी अतिथियों, वक्ताओं, संकाय सदस्यों, शोधार्थियों और स्वयंसेवकों का आभार व्यक्त करते हुए कहा—“यह आयोजन गणित विभाग की सामूहिक मेहनत, टीमवर्क और समर्पण का उत्कृष्ट उदाहरण है। हम भविष्य में भी इसी तरह प्रेरणादायक और शैक्षणिक रूप से समृद्ध कार्यक्रम आयोजित करते रहेंगे।”
माननीय कुलपति प्रो. एन. के. जोशी ने अपने संदेश में कहा—“गणित विभाग द्वारा आयोजित विशेष सत्र, अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन और विभिन्न शैक्षणिक गतिविधियाँ विभाग की उच्च शैक्षणिक गुणवत्ता और शोध-उन्मुख संस्कृति को दर्शाती हैं। मैं विभागाध्यक्ष प्रो. अनीता तोमर और उनकी टीम को इस सफल आयोजन के लिए हार्दिक बधाई देता हूँ। आशा है कि विभाग आने वाले वर्षों में भी विश्वविद्यालय की अकादमिक पहचान को और सशक्त बनाएगा।”
कार्यक्रम हर्षोल्लास और सकारात्मक ऊर्जा के साथ सम्पन्न हुआ। इस आयोजन ने सिद्ध किया कि गणित विभाग पं. एल. एम. एस. परिसर का शैक्षणिक उत्कृष्टता, नवाचार और शोध संस्कृति का अग्रणी केंद्र है।








