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बड़ी खबर: घुड़दौड़ी इंजीनियरिंग कॉलेज फिर विवादों मे, अब निदेशक पर उत्पीड़न का गंभीर आरोप, 3 करोड़ की पेमेंट का है मामला

November 15, 2024
in एक्सक्लूसिव
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बड़ी खबर: घुड़दौड़ी इंजीनियरिंग कॉलेज फिर विवादों मे, अब निदेशक पर उत्पीड़न का गंभीर आरोप, 3 करोड़ की पेमेंट का है मामला
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पौड़ी। लंबे समय से गोविंद बल्लभ पंत इंजीनियरिंग कॉलेज विवादों में रहा है। इसी कड़ी में अब एक नया विवाद कॉलेज को लेकर सामने आया है।
जीबी पंत इंजीनियरिंग इंस्टीट्यूट के सिविल इंजीनियरिंग विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. भीष्म सिंह खाती ने संस्थान के प्रभारी निदेशक डॉ. वी.एन. काला पर उत्पीड़न, प्रशासनिक लापरवाही, और कार्य में अनुचित दबाव का आरोप लगाया है।

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डॉ. खाती ने अपने पद से इस्तीफा देने की सिफारिश की है। डॉक्टर खाती एक ईमानदार छवि के अधिकारी हैं। डॉ. वी.एन. काला लंबे समय से उनका मानसिक उत्पीड़न कर रहे हैं। अधूरे काम की एवज मे 3 करोड़ के बिल पर साइन करने का दबाव बनाया जा रहा है।

डॉ. खाती ने उच्च अधिकारियों को भेजी शिकायत में बताया कि उन पर करोड़ों रुपये के निर्माण कार्यों का सत्यापन और भुगतान करने का अनुचित दबाव डाला जा रहा है, जबकि इस कार्य के लिए जरूरी कनिष्ठ अभियंता का पद पिछले साल से रिक्त है। उन्होंने नियमों के तहत बिना भौतिक सत्यापन के हस्ताक्षर करने से मना कर दिया, जिसके बाद उनके छुट्टी आवेदनों को अस्वीकृत कर धमकी दी गई।

डॉ. खाती ने आरोप लगाया कि सिविल विभाग में शिक्षकों की कमी के कारण कक्षाओं में व्यवधान हो रहा है और महत्वपूर्ण उपकरण खराब होने के बावजूद निदेशक कार्यालय की ओर से मरम्मत पर कोई ध्यान नहीं दिया गया। इसके अलावा, दिसंबर 2024 में आयोजित एक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में उनके शोधपत्र को प्रस्तुत करने की अनुमति भी निदेशक ने रोक दी, जबकि उनके पास पर्याप्त फंड था।

उन्होंने यह भी बताया कि निदेशक द्वारा आकस्मिक अवकाश भी अस्वीकृत कर दिया गया, जिससे उन्हें मानसिक उत्पीड़न का सामना करना पड़ रहा है। डॉ. खाती ने मामले में निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए उच्च अधिकारियों को हस्तक्षेप का अनुरोध किया है।

Tags: घुड़दौड़ी इंजीनियरिंग कॉलेज
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सरकार बहादुर पार्ट 3 : उत्तराखंड की बेटा सायरा सरकार की नितियों से परेशान, सोशल मीडिया पर हो रहा वीडियो वायरल  देहरादून। उत्तराखंड की बेटी सायर ने नेशनल ताइक्वांडो चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल जीतकर पूरे राज्य का सिर गर्व से ऊंचा कर दिया। देहरादून के CNI Girls School की कक्षा 12 की छात्रा सायरा ने अपनी मेहनत से इंटरनेशनल स्पर्धा के लिए भी क्वालीफाई किया। लेकिन सरकार की गलत नीतियों और उदासीनता की वजह से उसका सपना अधूरा रह गया।  10 अगस्त 2026 को देहरादून में हुए ‘मुख्यमंत्री युवा विद्यार्थी मंथन’ कार्यक्रम में जब सायरा मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के सामने पहुंची तो उसकी आंखें भर आईं। उसने बताया कि इंटरनेशनल टूर्नामेंट में जाने के लिए डेढ़ लाख रुपये चाहिए थे। घर की हालत ऐसी नहीं थी कि इतनी रकम जुटा पाती। नतीजा ये हुआ कि देश के लिए खेलने का मौका हाथ से चला गया।  यही है सरकार की “खेल नीति” की सच्चाई। एक तरफ ढोल पीटा जाता है “खेलो इंडिया” का, दूसरी तरफ गोल्ड मेडलिस्ट खिलाड़ी को बुनियादी मदद के लिए भी तरसना पड़ता है। सायरा के जिले में आज तक एक भी सरकारी ताइक्वांडो सेंटर नहीं बना। प्रैक्टिस के लिए हर महीने 8000 रुपये प्राइवेट हॉल को देने पड़ते हैं। बरसात में सरकारी स्टेडियम बंद रहते हैं या वीआईपी के नाम बुक रहते हैं। नेशनल के बाद मिलने वाला यात्रा भत्ता और प्रोत्साहन राशि आज भी फाइलों में अटकी है।  सायरा के माता-पिता ने कर्ज लेकर बेटी को नेशनल तक पहुंचाया। उन्हें उम्मीद थी सरकार सहयोग करेगी। लेकिन जब मदद मांगी तो जवाब मिला बजट नहीं है। वहीं जीत के बाद अफसर और नेता फोटो खिंचवाकर “बेटी बचाओ” का भाषण दे देते हैं।  सायरा का सवाल सरकार से सीधा है। अगर एक नेशनल गोल्ड मेडलिस्ट को डेढ़ लाख की कमी के कारण पीछे बैठना पड़े तो आम खिलाड़ी क्या करेगा? खिलाड़ियों और अभिभावकों की मांग है कि तुरंत हर जिले में फ्री कोचिंग, समय पर किट और भत्ता, और इंटरनेशनल जाने वाले खिलाड़ियों के लिए फंड की व्यवस्था हो।  साफ है सरकार को मेडल से मतलब है, खिलाड़ी से नहीं। जब तक नीतियां कागजों तक सीमित रहेंगी, सायरा जैसी बेटियां गोल्ड जीतकर भी अपने सपने बेचने को मजबूर रहेंगी। सायरा एक एनसीसी कैडेट भी है, सरकार खिलाड़ियों को आगे बढ़ाने के खोखले दावे करती है, इन दावों में कितना दम है यह धरातल पर पता चल रहा है।

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