नई दिल्ली। संसद के मानसून सत्र के पहले दिन राजधानी में सुरक्षा और सियासत दोनों गर्म रहीं। कॉकरोच जनता पार्टी के संसद मार्च के कारण सुबह से ही नई दिल्ली छावनी में तब्दील दिखी। इसी बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी संसद परिसर में मौजूद थे। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए सुरक्षा एजेंसियों ने प्रधानमंत्री की आवाजाही के लिए विशेष इंतजाम किए। गेट नंबर 35 के पास सुरक्षा का अभेद्य घेरा बनाया गया और वीआईपी मूवमेंट के दौरान पूरे इलाके को कुछ देर के लिए सील कर दिया गया। इसके बाद प्रधानमंत्री को कड़ी सुरक्षा के बीच संसद भवन से सुरक्षित बाहर निकाला गया।
संसद के बाहर माहौल तनावपूर्ण था। CJP नीट पेपर लीक और शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग को लेकर जंतर-मंतर से संसद तक मार्च निकालना चाह रही थी। दिल्ली पुलिस के मुताबिक इस मार्च के लिए कोई अनुमति नहीं ली गई थी। इसके बावजूद बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी बैरिकेड्स तोड़कर संसद मार्ग की ओर बढ़ने लगे। कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस को आंसू गैस के गोले छोड़ने पड़े और लाठीचार्ज करना पड़ा। रैपिड एक्शन फोर्स को भी मौके पर तैनात किया गया। सुरक्षा के मद्देनजर राजीव चौक, जनपथ, पटेल चौक, केंद्रीय सचिवालय और सेवा तीर्थ मेट्रो स्टेशन को भी अस्थायी रूप से बंद रखा गया।
संसद के भीतर का नजारा भी कुछ अलग नहीं था। बाहर प्रदर्शन और अंदर हंगामे के बीच सदन की कार्यवाही शुरू होते ही विपक्ष और सत्ता पक्ष आमने-सामने आ गए। विपक्षी दलों ने प्रदर्शनकारियों पर बल प्रयोग का मुद्दा उठाते हुए सरकार से जवाब तलब किया। उनका आरोप था कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन को ताकत के दम पर दबाया जा रहा है। वहीं सत्ता पक्ष की ओर से कहा गया कि संसद की सुरक्षा और देश की गरिमा से कोई समझौता नहीं किया जा सकता। सरकार ने स्पष्ट किया कि प्रतिबंधित क्षेत्र में प्रवेश और बैरिकेड तोड़ने की कोशिश पर कड़ी कार्रवाई जरूरी थी।
तीखी नोकझोंक और नारेबाजी के कारण लोकसभा और राज्यसभा दोनों की कार्यवाही बार-बार बाधित हुई। अंत में पीठासीन अधिकारियों को दोनों सदनों को निर्धारित समय तक के लिए स्थगित करना पड़ा।
दिल्ली पुलिस ने लोगों से शांति बनाए रखने और अफवाहों पर ध्यान न देने की अपील की है। प्रशासन का कहना है कि शांतिपूर्ण लोकतांत्रिक विरोध का अधिकार सभी को है, लेकिन कानून हाथ में लेने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।








