बद्रीनाथ धाम में श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए जाने वाले दान को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। दान-पात्रों यानी हुंडियों की चाबी अब तीर्थ पुरोहितों के बजाय बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति B.K.T.C. के पास होने के बाद गिनती और पारदर्शिता को लेकर मतभेद सामने आए हैं।
सूत्रों के अनुसार मंदिर में कुल 3 मुख्य दान पात्र रखे हैं। पहले इनकी चाबी तीर्थ पुरोहित समाज के पास रहती थी। लेकिन बीते कुछ समय से यह जिम्मेदारी B.K.T.C. को दे दी गई है। इसी बदलाव के बाद दान गिनने की प्रक्रिया में देरी और सूचना न दिए जाने का मामला सामने आया।
जानकारी के मुताबिक करीब 10 दिन बाद जब दान पात्र खोले गए तो उनमें लाखों रुपये का चढ़ावा निकला। आरोप है कि गिनती के समय संबंधित पुरोहितों को सूचना नहीं दी गई, जिससे नाराजगी फैल गई। तीर्थ पुरोहितों का कहना है कि परंपरा के अनुसार दान गिनती में उनकी मौजूदगी जरूरी है।
वहीं B.K.T.C. पूर्व अध्यक्ष अजेंद्र अजय ने कहा कि पारदर्शिता बनाए रखने के लिए अब दान पात्रों की चाबी समिति के पास रहेगी और गिनती सीसीटीवी की निगरानी में समिति के अधिकारियों की मौजूदगी में होगी। उन्होंने बताया कि वित्त वर्ष 2023-24 और 2024-25 में मंदिर को दान के रूप में 16 करोड़ रुपये से अधिक की राशि प्राप्त हुई है। समिति ने लैपटॉप और काउंटर के माध्यम से पूरा रिकॉर्ड भी तैयार किया है।
मामले के बाद मंदिर प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि आगे से दान गिनने की पूरी प्रक्रिया नियमों के तहत और पारदर्शी तरीके से की जाएगी, ताकि श्रद्धालुओं का विश्वास बना रहे।








