राम मंदिर में चढ़ावे को लेकर विवाद के बीच अब एक और बड़ा दावा सामने आया है। आरोप है कि भारत सरकार के एक पूर्व गृह सचिव द्वारा रामलला को भेंट की गई करीब 1 किलो शुद्ध सोने से बनी दुर्लभ रामचरितमानस का मंदिर ट्रस्ट के पास कोई स्पष्ट लेखा-जोखा नहीं है।
दावों के अनुसार, पूर्व गृह सचिव ने यह बहुमूल्य धार्मिक भेंट राम मंदिर ट्रस्ट को सौंपी थी। लेकिन उस समय उन्हें इसकी कोई रसीद नहीं दी गई। बाद में भी इस भेंट को लेकर संतोषजनक जानकारी नहीं दी गई।
आरोप लगाया गया है कि जब पूर्व गृह सचिव ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय से मिलने गए तो उन्हें एक बार लगभग 9 घंटे और दूसरी बार करीब 4 घंटे तक इंतजार करना पड़ा। रसीद और भेंट का विवरण मांगने पर उन्हें निराशा और अपमान का सामना करना पड़ा।
इस दावे के बाद सवाल उठ रहे हैं कि अगर एक पूर्व गृह सचिव जैसी वरिष्ठ अधिकारी द्वारा दी गई इतनी कीमती भेंट का रिकॉर्ड ही उपलब्ध नहीं है, तो आम श्रद्धालुओं द्वारा किए गए दान और चढ़ावे की पारदर्शिता और सुरक्षा का क्या होगा?
फिलहाल राम मंदिर ट्रस्ट की ओर से इस दावे पर आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।
इस पूरे मामले ने एक बार फिर राम मंदिर में दान-पुण्य और चढ़ावे के हिसाब-किताब को लेकर बहस छेड़ दी है।








