उत्तराखंड के हरिद्वार स्थित पतंजलि फूड्स की निर्माण इकाई में तैयार किए गए लाल मिर्च पाउडर का एक सैंपल खाद्य सुरक्षा मानकों पर खरा नहीं उतरा। परीक्षण के दौरान इसमें कीटनाशक अवशेषों का स्तर तय अधिकतम सीमा से अधिक पाया गया, जिसके बाद इसे असुरक्षित घोषित किया गया। यह जानकारी केंद्र सरकार ने लोकसभा में दी।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री प्रतापराव जाधव ने लिखित उत्तर में कहा कि वर्ष 2024–25 के दौरान मसालों पर चलाए गए विशेष सैंपलिंग अभियान में यह गड़बड़ी सामने आई। रिपोर्ट के आधार पर संबंधित प्राधिकरण ने तत्काल रिकॉल आदेश जारी किया, जिसके बाद कंपनी ने प्रभावित बैच को बाजार से वापस लेने की प्रक्रिया शुरू की।
बाजार से उत्पाद हटाने की कार्रवाई
मंत्री ने स्पष्ट किया कि परीक्षण परिणाम आने के बाद संबंधित खाद्य व्यवसाय संचालक (FBO) को नियमानुसार कार्रवाई के निर्देश दिए गए। खाद्य सुरक्षा नियमों के तहत असुरक्षित उत्पादों को बाजार में बनाए रखना दंडनीय अपराध है। हालांकि, मंत्री ने यह भी साफ किया कि अमूल ब्रांड के किसी भी खाद्य उत्पाद का कोई सैंपल खाद्य सुरक्षा मानकों के विरुद्ध नहीं पाया गया है।
एफएसएसएआई की निगरानी में देशभर में सख्त जांच
तृणमूल कांग्रेस सांसद महुआ मोइत्रा के सवाल पर मंत्री ने बताया कि उपभोक्ताओं को सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण भोजन उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) की है।
उन्होंने कहा कि एफएसएसएआई और राज्य खाद्य सुरक्षा विभाग मिलकर पूरे वर्ष निरीक्षण, सैंपलिंग और प्रवर्तन अभियान चलाते हैं। इनमें नेशनल एनुअल सर्विलांस प्लान (NASP) जैसे विशेष कार्यक्रम भी शामिल हैं। नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर दोषी कंपनियों पर जुर्माना और अन्य कानूनी कार्रवाई की जाती है।
पहले भी गुणवत्ता पर उठ चुके हैं सवाल
यह पहला मामला नहीं है जब पतंजलि के उत्पादों की गुणवत्ता पर सवाल खड़े हुए हों। इसी महीने की शुरुआत में पतंजलि निर्मित घी का सैंपल गुणवत्ता परीक्षण में फेल हुआ था, जिस पर उत्तराखंड की एक अदालत ने कंपनी, डिस्ट्रीब्यूटर और रिटेलर पर कुल 1.40 लाख से अधिक का जुर्माना लगाया था।
इससे पहले जनवरी 2024 में एफएसएसएआई ने पतंजलि के लाल मिर्च पाउडर के एक बैच को वापस मंगाने के निर्देश दिए थे।
मई 2024 में सोन पापड़ी के गुणवत्ता परीक्षण में फेल होने पर पतंजलि आयुर्वेद के एक अधिकारी सहित तीन लोगों को छह महीने की सजा सुनाई गई थी
कई आयुर्वेदिक दवाओं के निर्माण लाइसेंस भी नियम उल्लंघन के चलते निलंबित किए जा चुके हैं।
मसाला उद्योग पर बढ़ी सरकारी सख्ती
गौरतलब है कि पिछले वर्ष अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारतीय मसालों की गुणवत्ता को लेकर सवाल उठे थे। हांगकांग और सिंगापुर में कुछ भारतीय मसालों की बिक्री निलंबित होने के बाद सरकार ने देशभर में खाद्य उत्पादों की जांच तेज कर दी है।
सरकार का कहना है कि खाद्य सुरक्षा से किसी भी तरह का समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और नियमों का उल्लंघन करने वाली कंपनियों पर सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।
उत्तराखंड स्थित पतंजलि फूड्स की निर्माण इकाई में निर्मित लाल मिर्च पाउडर का एक नमूना असुरक्षित घोषित किया गया, यह जानकारी केंद्र सरकार ने शुक्रवार को लोकसभा में दी।








