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बड़ी खबर : अब निजी स्कूल के शिक्षक पर लगे छात्राओं से छेड़छाड़ के आरोप, महिला आयोग ने लिया संज्ञान

December 2, 2025
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बड़ी खबर : अब निजी स्कूल के शिक्षक पर लगे छात्राओं से छेड़छाड़ के आरोप, महिला आयोग ने लिया संज्ञान
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देहरादून। उत्तराखंड में लगातार छात्राओं से छेड़छाड़ करने के मामले सामने आ रहे हैं। अब जनपद देहरादून के सहसपुर क्षेत्र के एक निजी स्कूल में नवीं व दसवीं कक्षा की छात्राओं द्वारा अपने शिक्षक पर लगाए गए छेड़छाड़ व अनुचित व्यवहार के आरोपों ने पूरे शिक्षा जगत को हिला दिया है। छात्राओं ने बताया कि शिक्षक लंबे समय से गलत नीयत से छूने, अभद्र हरकतें करने और विरोध करने पर परीक्षा में फेल करने की धमकी देता रहा।

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सरकार बहादुर पार्ट 3 : उत्तराखंड की बेटा सायरा सरकार की नितियों से परेशान, सोशल मीडिया पर हो रहा वीडियो वायरल  देहरादून। उत्तराखंड की बेटी सायर ने नेशनल ताइक्वांडो चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल जीतकर पूरे राज्य का सिर गर्व से ऊंचा कर दिया। देहरादून के CNI Girls School की कक्षा 12 की छात्रा सायरा ने अपनी मेहनत से इंटरनेशनल स्पर्धा के लिए भी क्वालीफाई किया। लेकिन सरकार की गलत नीतियों और उदासीनता की वजह से उसका सपना अधूरा रह गया।  10 अगस्त 2026 को देहरादून में हुए ‘मुख्यमंत्री युवा विद्यार्थी मंथन’ कार्यक्रम में जब सायरा मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के सामने पहुंची तो उसकी आंखें भर आईं। उसने बताया कि इंटरनेशनल टूर्नामेंट में जाने के लिए डेढ़ लाख रुपये चाहिए थे। घर की हालत ऐसी नहीं थी कि इतनी रकम जुटा पाती। नतीजा ये हुआ कि देश के लिए खेलने का मौका हाथ से चला गया।  यही है सरकार की “खेल नीति” की सच्चाई। एक तरफ ढोल पीटा जाता है “खेलो इंडिया” का, दूसरी तरफ गोल्ड मेडलिस्ट खिलाड़ी को बुनियादी मदद के लिए भी तरसना पड़ता है। सायरा के जिले में आज तक एक भी सरकारी ताइक्वांडो सेंटर नहीं बना। प्रैक्टिस के लिए हर महीने 8000 रुपये प्राइवेट हॉल को देने पड़ते हैं। बरसात में सरकारी स्टेडियम बंद रहते हैं या वीआईपी के नाम बुक रहते हैं। नेशनल के बाद मिलने वाला यात्रा भत्ता और प्रोत्साहन राशि आज भी फाइलों में अटकी है।  सायरा के माता-पिता ने कर्ज लेकर बेटी को नेशनल तक पहुंचाया। उन्हें उम्मीद थी सरकार सहयोग करेगी। लेकिन जब मदद मांगी तो जवाब मिला बजट नहीं है। वहीं जीत के बाद अफसर और नेता फोटो खिंचवाकर “बेटी बचाओ” का भाषण दे देते हैं।  सायरा का सवाल सरकार से सीधा है। अगर एक नेशनल गोल्ड मेडलिस्ट को डेढ़ लाख की कमी के कारण पीछे बैठना पड़े तो आम खिलाड़ी क्या करेगा? खिलाड़ियों और अभिभावकों की मांग है कि तुरंत हर जिले में फ्री कोचिंग, समय पर किट और भत्ता, और इंटरनेशनल जाने वाले खिलाड़ियों के लिए फंड की व्यवस्था हो।  साफ है सरकार को मेडल से मतलब है, खिलाड़ी से नहीं। जब तक नीतियां कागजों तक सीमित रहेंगी, सायरा जैसी बेटियां गोल्ड जीतकर भी अपने सपने बेचने को मजबूर रहेंगी। सायरा एक एनसीसी कैडेट भी है, सरकार खिलाड़ियों को आगे बढ़ाने के खोखले दावे करती है, इन दावों में कितना दम है यह धरातल पर पता चल रहा है।

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पीड़ित छात्राओं का कहना है कि मामले की शिकायत स्कूल प्रबंधन को दी गई, लेकिन कार्रवाई करने के बजाय उन्हें ही डराकर चुप रहने का दबाव बनाया गया। पीड़िताओं के अनुसार, कई अन्य छात्राएं भी पहले ऐसी हरकतों का शिकार हुई हैं, लेकिन डर और शर्म के कारण सामने नहीं आ सकीं। आरोप है कि पूरा स्कूल स्टाफ आरोपी शिक्षक का बचाव कर रहा है।

मामले की गंभीरता को देखते हुए उत्तराखंड राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष कुसुम कंडवाल ने तत्काल संज्ञान लिया है। उन्होंने जनपद देहरादून के मुख्य शिक्षा अधिकारी को निर्देश दिए हैं कि पूरे प्रकरण की गहन जांच की जाये साथ ही जब तक मामला स्पष्ट नही हो जाता उक्त शिक्षक को निलंबित रखा जाए।

साथ ही, पुलिस प्रशासन को भी गंभीरता से जांच कर कड़ी कार्रवाई करने के निर्देश जारी किए गए हैं। महिला आयोग ने स्कूल प्रबंधन, विशेषकर स्कूल के प्रबंधक व समिति को आरोपी शिक्षक के बचाव से जुड़े आरोपों पर तलब करने को कहा है।

अध्यक्ष कुसुम कण्डवाल ने कहा कि इस घटना ने संस्थान में छात्राओं की सुरक्षा पर गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं और किशोरियों व महिलाओं की सुरक्षा के मामले में आयोग बिल्कुल भी लापरवाही बर्दाश्त नही करेगा। मामले में गंभीर जांच के साथ आरोपी के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

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