रिपोर्ट- राजकुमार सिंह परिहार
कुमाऊं। उत्तराखंड में लगातार हो रही भारी बारिश के बीच कई जिलों में बादल फटने की घटनाएं सामने आई हैं। देर रात मूसलाधार बारिश के चलते बागेश्वर जनपद में बादल फटने से भारी तबाही हुई है। कपकोट विकासखंड के ग्राम पौंसारी में भारी वर्षा के कारण जनहानि एवं मकान क्षतिग्रस्त होने की सूचना प्राप्त हुई है। एक ही परिवार के पांच लोगों के दबे होने की आशंका है। जिनमें से दो के शव निकाले जा चुके हैं। बाकी तीन की खोजबीन जारी है।
आपको बताते चलें कपकोट क्षेत्र के ग्राम पौंसारी के खाईजर तोक में गुरुवार देर रात बादल फटने की भयावह घटना हुई, जिसमें दो परिवार बुरी तरह प्रभावित हुए हैं। घटना में घरों में मलबा घुस जाने से कई जानें संकट में पड़ गईं। पहले परिवार के रमेश चंद्र जोशी लापता हैं, उनकी पत्नी बसंती देवी का शव बरामद कर लिया गया है, जबकि बेटा गिरीश अब तक लापता है। परिवार का छोटा बेटा पवन सुरक्षित है। वहीं दूसरे परिवार के पूरण जोशी लापता बताए जा रहे हैं, जबकि उनकी मां बचुली देवी का शव बरामद हुआ है।
आपदा से न केवल जानमाल बल्कि गांव की सड़क, छोटी पुलिया और रास्ते भी क्षतिग्रस्त हो गए हैं। खेतों में मलबा भरने से कृषि को भी भारी नुकसान पहुँचा है, साथ ही पशुधन की हानि की सूचना भी सामने आई है।
घटना की जानकारी मिलते ही एसडीआरएफ और जिलाधिकारी आशीष भटगांई, जिला प्रशासन की टीमें मौके पर पहुंच गई हैं, और लापता लोगों की खोजबीन के साथ राहत एवं बचाव कार्य जारी है। प्रशासन ने प्रभावित परिवारों को हर संभव मदद और आवश्यक सहयोग का आश्वासन दिया है।
वहीं दूसरी तरफ ग्राम बैसानी क्षेत्र में भी भूस्खलन से कुछ नुकसान की सूचना है। जिसमें 13 बकरियां व अन्य पशु हानि की ख़बर है। सूचना मिलते ही जिला प्रशासन की टीमें राहत व बचाव कार्य के लिए घटना स्थल को रवाना हो गए हैं।
जिलाधिकारी आशीष भटगांई स्वयं घटनास्थल पर मौजूद रहकर राहत एवं बचाव कार्यों की निगरानी कर रहे हैं। एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, पुलिस एवं राजस्व विभाग की टीमें सक्रिय रूप से रेस्क्यू आपरेशन में लगी हुई हैं। प्रभावित लोगों को त्वरित सहायता एवं सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के लिए जिला प्रशासन हर संभव कदम उठा रहा है। जिलाधिकारी की अध्यक्षता में सभी जिलास्तरीय अधिकारी आपदा कंट्रोल रूम से निरंतर समन्वय कर रहे हैं। प्रभावित क्षेत्रों में पीडब्ल्यूडी एवं पीएमजीएसवाई की टीमें मार्ग खोलने के लिए तत्परता से काम कर रही हैं। वैकल्पिक रास्तों को चिन्हित कर राहत दलों को भेजा जा रहा है।
इसके अतिरिक्त जिला स्तर से विभिन्न अधिकारियों को राजस्व निरीक्षकों एवं अन्य कार्मिकों के साथ प्रभावित ग्रामों में भेजकर तत्काल कार्रवाई की जा रही है। जिलाधिकारी लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं और प्रभावित परिवारों को हर संभव मदद पहुंचाने के निर्देश दिए गए हैं।
पवन ने सुनाई काली रात की आपबीती
घनघोर अंधेरा, उसपर ऊपर से बरसती आसमानी आफत, आधी नींद में माता-पिता तथा भाई को खोजती आंखें तथा एक बकरी का सहारा, जंगली सूअरों का झुंड ने भी परेशान किया। लेकिन पवन ने इंद्रदेव के प्रकोप से जीवन की जंग जीत ली।
रात 11 बजे से वह सुबह तीन बजे यानी पूरे चार घंटे तक नींद में गांव वालों को आवाज लगाते रहा। गांव के लोग आए तो रात भर साथ रही बकरी भी उसे छोड़कर गधेरे में उसकी आंखों के सामने बह गई। पवन के साथ जाको राखे साइयां, मार सके न कोई कहावत चरितार्थ हुई है।
कनलगढ़ घाटी के पौंसरी ग्राम पंचायत के खाईगैर में अपने माता-पिता तथा छोटे भाई के साथ रह रहे पवन जोशी के लिए गुरुवार की रात खौफभरी रही। वह भोजन करने के बाद लगभग 10 बजे अपने छोटे भाई गिरीश जोशी के साथ सो गया। उन्हें नींद भी आ गई। एकाएक उनका मकान पानी में बहने लगा। मकान की छत की टिन के ऊपर वह कब आया तथा टिन सहित वह गधेरे के तेज बहाव से छिटक कर लगभग 300 मीटर ऊपर की तरफ अपने खेत में पहुंच गए। उनके साथ एक बकरी भी थी। वह नींद में ही माता-पिता तथा भाई को आवाज देते रहा। लेकिन दूसरी तरफ घना अंधेरा व मरघट जैसा शोर था।
पौंसारी गधेरा तेजी से बह रहा था। आसमान से बिजली कड़क रही थी। वर्षा ने उसके तन- मन को पूरी तरह भिगो दिया था। भयभीत तथा डरवाना मंजर उसकी आंखों के सामने कौंद रहा था। उसकी समझ में पहले कुछ नहीं आया। वह आसमान ताकते रहा। समझा कि उसके घर की छत टपक रही है। जब उसने होश संभाला तो सूअरों के झुंड ने उस पर हमला करने की कोशिश की। उसने बकरी को भी बचा लिया तथा स्वयं भी बच गया। सुबह लगभग तीन बजे तक वह आपदा से जंग लड़ता रहा।
सुबह तीन बजे मानीगैर के सुरेश सिंह ने उसकी आवाज सुनी। वह सबसे पहले वहां पहुंचा। तब उसे पता चला कि उनका सब कुछ बर्बाद हो गया है।
गंगा के आने के बाद पौंसारी गांव के लोग भी बड़ी संख्या मे पहुंच गए। उसे अपने साथ ले गई। लेकिन बकरी नदी की तरफ चली गई और बह गई। पवन कहता है कि उनके पास 30 बकरियां थीं। एक गाय, दो बैल तथा दो बछिया थीं। इसके अलावा एक कुत्ता भी उनके परिवार का हिस्सा था।
सबकुछ हो गया बर्बाद, पुनर्वास की आस
जिला अस्पताल में भर्ती 15 वर्षीय पवन राइंका बैसानी में कक्षा सातवीं में पढ़ता है। वह प्रकृति के प्रकोप को हराकर लौटा है। उसकी पांच बहनें हैं। दया, रीमा, खष्टी, आशा, गुंजा। बड़ा भाई गणेश जोशी दिल्ली में नौकरी करता है।
लापता छोटा भाई गिरीश जोशी कक्षा पांचवीं का छात्र है। उसके पिता रमेश चंद्र जोशी खेती तथा मजदूरी जबकि माता बसंती देवी गृहणी हैं। वह कहता है कि उसका सबकुछ बर्बाद हो गया है। उसे सरकार से नौकरी तथा पुनर्वास की आस है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार जिला प्रशासन ने बैसानी गांव में जमाया डेरा। प्रभावित परिवारों को दी मदद, रहने का भी किया इतजाम। स्थानीय विधायक सुरेश गड़िया, जिलाधिकारी आशीष भटगाईं और सीडीओ आर सी तिवारी मौके पर। प्रभावितों को दिया भरोसा। हर संभव दी जायेगी सहायता।